डॉक्टर के ‘फर्जी सहायक’ ने ₹5 के फेर में फंसाया, राजगंज के व्यवसायी के दो खातों से आधे घंटे में उड़ाए ₹2 लाख

 कोयलांचल में साइबर अपराधियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बार ठगों ने राजगंज मोड़ निवासी प्रतिष्ठित व्यवसायी राम प्रसाद अग्रवाल को अपना निशाना बनाते हुए यूपीआई के माध्यम से उनके बैंक आफ इंडिया के दो अलग-अलग खातों से कुल दो लाख रुपये की अवैध निकासी कर ली।

इस शातिर ठगी का खुलासा तब हुआ जब व्यवसायी के मोबाइल पर लगातार ट्रांजेक्शन संबंधी संदेश आने लगे। आनन-फानन में पीड़ित व्यवसायी बैंक पहुंचे और संबंधित खातों को फ्रीज कराया।

पीड़ित ने इस संबंध में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर स्थानीय थाना में एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया की जा रही है।

आधे घंटे के भीतर छह ट्रांजेक्शन कर उड़ाए दो लाख रुपए

जानकारी के अनुसार, सोमवार 22 जून की सुबह 10:52 बजे से 11:22 बजे के बीच महज आधे घंटे के भीतर साइबर ठगों ने यूपीआई के माध्यम से व्यवसायी के दोनों खातों को खंगाल डाला और कुल छह ट्रांजेक्शन कर दो लाख रुपये निकाल लिए।

शातिरों ने एक खाते से एक लाख रुपये सीधे ‘अमेजन पे’ में ट्रांसफर किए, जबकि दूसरे खाते से जालसाजी करते हुए 19,994.99/-, 19,995.99/-, 19,996.98/-, 19,997.99/- एवं 19,999.84/- रुपये के पांच अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर राशि उड़ा ली।

डॉक्टर के फर्जी सहायक ने पांच रुपए के नाम पर जाल में फंसाया

पीड़ित व्यवसायी ने बताया कि गत 19 जून को डॉक्टर से अप्वाइंटमेंट बुक करने के लिए वे गूगल पर नंबर खोज रहे थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को डॉक्टर का सहायक बताकर ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट के नाम पर मात्र 5 रुपये का भुगतान करने को कहा।

ऑटो-पे के माध्यम से भुगतान का प्रयास करते समय व्यवसायी ने अपना यूपीआई पिन दर्ज कर दिया, हालांकि उस समय वह ट्रांजैक्शन असफल रहा।

इसके बाद से ही उनके मोबाइल पर बैंक खाते को यूपीआई से लिंक किए जाने संबंधी संदेश आने लगे और सोमवार को सुबह शातिरों ने उनके दो बैंक खातों से करीब 2 लाख रुपये की अवैध निकासी कर घटना को अंजाम दे दिया।

शाखा प्रबंधक ने दी सतर्क रहने की सलाह, खाते किए गए फ्रीज

बैंक ऑफ इंडिया, राजगंज शाखा के प्रबंधक अविनाश कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही जिन खातों से राशि हस्तांतरित की गई है, उन्हें सुरक्षा के दृष्टिकोण से तत्काल फ्रीज कर दिया गया है तथा आगे की आवश्यक तकनीकी प्रक्रिया जारी है।

शाखा प्रबंधक ने आम जनता और उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें और साइबर सुरक्षा को लेकर हमेशा सतर्क रहें।

अधिकार क्षेत्र के चक्कर में थानों के बीच भटके पीड़ित व्यवसायी

पीड़ित राम प्रसाद अग्रवाल ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि ठगी के शिकार होने के बाद जब वे मामले की लिखित शिकायत लेकर राजगंज थाना पहुंचे, तो वहां से उन्हें साइबर थाना धनबाद जाने की सलाह देकर लौटा दिया गया।

जब पीड़ित परेशान हाल में धनबाद स्थित साइबर थाना पहुंचे, तो वहां के अधिकारियों ने यह दलील देते हुए राजगंज थाना भेज दिया कि ठगी गई कुल रकम दो लाख रुपये से कम है, इसलिए नियमानुसार संबंधित स्थानीय थाना में ही प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। थानों के इस चक्कर से पीड़ित को काफी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।

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