पेड़ उखड़े, बिजली के खंभे टूटे, घरों को पहुंचा नुकसान… तमिलनाडु में बवंडर जैसे तूफान ने मचाई तबाही

तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले में रविवार शाम को अचानक आए एक भयानक और विनाशकारी तूफान ने भारी तबाही मचाई है। इस तूफान के कारण कई घर, बिजली के खंभे, एक टोल प्लाजा और एक प्राइवेट थीम पार्क पूरी तरह बर्बाद हो गए। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें धूल और मलबे का एक बहुत बड़ा घूमता हुआ खंभा आसमान की तरफ उठता हुआ दिखाई दे रहा है।

इसे देखकर लोग इसे ‘बवंडर’ कह रहे हैं, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों ने साफा किया है कि यह बवंडर नहीं, बल्कि बादलों की एक खास स्थिति के कारण उठी तेज हवाएं थीं।

कहां और कितना हुआ नुकसान?

बता दें कि यह तूफान तूतुकुड़ी शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर, तूतुकुड़ी-तिरुनेलवेली हाईवे पर स्थित वागाईकुलम और मुडिवैथनेन्दल गांवों में आया, जिसके चलते गांव में रहने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लगभग 200 घरों की छतें उड़ गईं, पेड़ जड़ से उखड़ गए और बिजली के खंभे टूट गए। लोगों के घरों का सामान हवा में उड़कर दूर जा गिरा।

थीम पार्क और टोल प्लाजा तबाह

इतना ही नहीं इस तूफान के चलते हाईवे पर स्थित एक प्राइवेट थीम पार्क के झूले और अन्य मशीनें टूट गईं। पास के टोल प्लाजा के कांच, कंप्यूटर और अन्य कीमती उपकरण भी बर्बाद हो गए। नुकसान की वजह से कुछ देर के लिए टोल टैक्स की वसूली रोकनी पड़ी और गाड़ियों को मुफ्त में निकाला गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस तूफान से कुल 5 से 6 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि इतनी भीषण तबाही के बाद भी राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई। सिर्फ दो लोगों को मामूली चोटें आई हैं।

‘हवा में उड़ने लगे थे बच्चे’

इसके अलावा गांव वालों ने यह भी बताया कि जब यह तूफान आया, तब मैदान में 9 बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। हवा इतनी तेज थी कि बच्चे जमीन से ऊपर उठने लगे। खुद को बचाने के लिए सभी बच्चों ने एक-दूसरे को कसकर पकड़ लिया और जमीन पर बैठ गए, जिससे उनकी जान बची।

मौसम विभाग ने क्या कहा?

चेन्नई के क्षेत्रीय मौसम केंद्र (RMC) ने लोगों से इसे ‘बवंडर’ न कहने की अपील की है। मौसम वैज्ञानिकों ने समझाया कि दक्षिण तमिलनाडु के आसमान में करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवा का दबाव बनने के कारण ‘क्युम्युलोनिम्बस’ नाम के भारी बादल बने थे। इन बादलों की वजह से जमीन से हवा बहुत तेजी से ऊपर की तरफ खींची चली गई।

इसी वजह से जमीन की धूल और मलबा आसमान में गोल घूमता हुआ दिखाई दिया, जो देखने में बवंडर जैसा लग रहा था। वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के मौसम में तूतुकुड़ी में असली बवंडर बनने के लिए जरूरी मौसम संबंधी परिस्थितियां नहीं होती हैं। यह सिर्फ एक स्थानीय और अचानक उठा तेज हवा का बवंडर था।

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