ओडिशा: सरकारी फाइलों में अटका आशियाना, टीनशेड के नीचे कट रही दृष्टिहीन जापा भुए और बुजुर्ग मां की जिंदगी

सरकार गरीबों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है। आवास, पेंशन और खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के दावे भी किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है। सुवर्णपुर जिले के बिनिका ब्लॉक के बगाड़िया गांव में रहने वाले जन्मजात दृष्टिहीन जापा भुए और उनकी बुजुर्ग मां राधिका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

56 वर्षीय जापा भुए ने जन्म से आज तक दुनिया को अपनी आंखों से नहीं देखा। हाल ही में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह उनकी वृद्ध मां के कंधों पर आ गई है। मां-बेटे का जीवन आज भी एक जर्जर एस्बेस्टस वाले मकान में गुजर रहा है, जहां हर मौसम उनके लिए नई मुश्किलें लेकर आता है।

टूटी छत के नीचे संघर्ष भरी जिंदगी

बगाड़िया गांव के एक कोने में स्थित उनका घर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकता है। दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं और छत भी काफी कमजोर हो गई है। इसी छोटे से कमरे में खाना बनता है, वहीं भोजन किया जाता है और रात में मां-बेटा सोते हैं।

परिवार को सरकारी सहायता के रूप में केवल पेंशन और 10 किलो चावल मिलता है। गांव वालों का कहना है कि यह सहायता उनकी जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। कई बार उन्हें पड़ोसियों की मदद से ही दो वक्त का भोजन नसीब हो पाता है।

एक ग्रामीण ने बताया कि जापा भुए और उनकी मां बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं। पेंशन से दवा, भोजन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना संभव नहीं है। ऐसे में दोनों को अक्सर अभावों का सामना करना पड़ता है।

आवास योजना का इंतजार खत्म नहीं हुआ

सरकार की विभिन्न आवास योजनाओं के बावजूद जापा भुए का परिवार अब तक पक्का घर पाने से वंचित है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवेदन किए गए, लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।

गर्मी के दिनों में घर के भीतर रहना मुश्किल हो जाता है, जबकि बारिश के समय पानी टपकने और छत गिरने का डर बना रहता है। ऐसी स्थिति में कई बार मां-बेटे को पड़ोसियों के बरामदे में शरण लेनी पड़ती है।

प्रशासन ने शुरू की जांच

मामला सामने आने के बाद बिनिका के ब्लॉक विकास अधिकारी (बीडीओ) सरत बाग ने कहा कि प्रशासन को इस संबंध में जानकारी मिली है और जांच शुरू कर दी गई है। परिवार की भूमि और पात्रता संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। पात्र पाए जाने पर उन्हें आवास योजना और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

उम्मीद अभी बाकी है

जीवनभर अंधकार में रहने वाले जापा भुए की सबसे बड़ी इच्छा एक सुरक्षित छत है, जहां वह और उनकी मां सम्मानपूर्वक जीवन बिता सकें। वहीं उनकी बुजुर्ग मां की भी यही कामना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें मिले और वर्षों का संघर्ष कुछ हद तक कम हो सके।

यह कहानी केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि उन तमाम जरूरतमंद लोगों की है जो आज भी सरकारी योजनाओं के लाभ की प्रतीक्षा में हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन की पहल जापा भुए और उनकी मां के जीवन में कितनी राहत लेकर आती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *