OSM विवाद पर CBSE का बड़ा कदम, 12वीं का डेटा अपने सर्वर पर किया ट्रांसफर

सीबीएसई की आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली को लेकर उठे विवादों के बीच बोर्ड ने 12वीं की कापियों और पुनर्मूल्यांकन से जुड़े डाटा को निजी कंपनी के सर्वर से हटाकर अपने सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया है।

हालांकि, तकनीकी खामियों के बावजूद बोर्ड ने पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में कापियों की स्कैनिंग का काम हैदराबाद स्थित कंपनी कोएम्प्ट एडुटेक प्राइवेट लिमिटेड को ही जारी रखने का फैसला लिया है।

यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है, जब सीबीएसई की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली विवादों में है। हाल ही में 12वीं के छात्र तनिष्क वत्स ने आरोप लगाया था कि परिणाम घोषित होने के बाद उसे जो मार्कशीट मिली उसमें विषयवार अंक दर्ज नहीं थे।

बाद में जब परिवार ने पुनर्मूल्यांकन के लिए छह विषयों की स्कैन की गई उत्तरपुस्तिकाएं मांगीं तो उनमें से केवल पांच ही उपलब्ध कराई गईं। जीव विज्ञान की उत्तरपुस्तिका गायब थी। बाद में सीबीएसई ने छात्र को गायब कापी उपलब्ध करा दी।

बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, छात्र की संशोधित मार्कशीट परिणाम घोषित होने के पांच दिन बाद 18 मई को जारी कर दी गई थी। अब उत्तरपुस्तिका से जुड़ी समस्या भी सुलझा ली गई है। वहीं, सीबीएसई ने ओएसएम पोर्टल की खामियों को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की मदद ली।

आइआइटी कानपुर और आइआइटी मद्रास के विशेषज्ञों को बोर्ड की डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा जांच के लिए लगाया गया। एक आइआइटी अधिकारी के अनुसार, उत्तर पुस्तिकाओं और उनसे जुड़े रिकार्ड का पूरा डाटा अब सीबीएसई के अपने सर्वरों पर स्थानांतरित कर दिया है।

साथ ही ओएसएम प्लेटफार्म के कोड की समीक्षा कर उसमें आवश्यक बदलाव किए गए हैं। हालांकि, डाटा अपने नियंत्रण में लेने के बावजूद बोर्ड ने कोएम्प्ट एडुटेक कंपनी को प्रक्रिया से बाहर नहीं किया है।

अधिकारी के अनुसार, पुनर्मूल्यांकन के दौरान उत्तरपुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम कंपनी ही करेगी। कंपनी ने पहले लगभग 40 करोड़ पृष्ठ स्कैन किए थे, जिनमें से करीब 30 हजार पृष्ठों में समस्या सामने आई थी। ऐसे में अब केवल विवादित या प्रभावित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग करानी है, जिसे कंपनी आसानी से संभाल सकती है।

ओएसएम प्रणाली की सुरक्षा को लेकर आइआइटी कानपुर, आइआइटी मद्रास, डिजिटल इंडिया कार्पोरेशन और सीबीएसई की संयुक्त टीमों ने कई चरणों में परीक्षण किए। प्लेटफार्म पर संभावित कमजोरियों की पहचान कर उसमें सुधार किया। प्रणाली को लागू करने से पहले पांच चरणों में सुरक्षा मूल्यांकन किया गया।

वहीं, सऊदी अरब में परीक्षा देने वाले एक छात्र ने भी बिना विषयवार अंकों वाली मार्कशीट मिलने का दावा किया, मामला कोर्ट पहुंच चुका है।

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