भागलपुर में गैस नहीं मिल रही; सतर्क रहें… गोयठा, लकड़ी और इलेक्ट्रिक उपकरण का अभी से करें इस्तेमाल

 भागलपुर में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर प्रशासन के दावे अब सवालों के घेरे में हैं। कागजों में मांग से अधिक आपूर्ति दिखाई जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि शहर के कई इलाकों में उपभोक्ता हफ्तों से गैस सिलिंडर के लिए भटक रहे हैं। स्थिति अब आम असुविधा से आगे बढ़कर गंभीर संकट का रूप ले चुकी है।

आपूर्ति के दावे और जमीनी हकीकत में अंतर

जिला प्रशासन का दावाहै कि प्रतिदिन 8756 सिलिंडर की मांग के मुकाबले 12700 सिलिंडर की आपूर्ति की जा रही है। यह आंकड़े कागजों पर व्यवस्था को सुचारु दिखाते हैं, लेकिन शहर के अलग-अलग इलाकों से मिल रही शिकायतें इस दावे को कमजोर करती हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि बुकिंग के बावजूद समय पर सिलिंडर नहीं मिल रहा है और डिलीवरी की तारीख लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि आपूर्ति और वितरण के बीच कहीं न कहीं बड़ा गैप है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

अनशन की चेतावनी से बढ़ा मामला

नाथनगर के वार्ड 08 निवासी विक्रांत कुमार ने गैस नहीं मिलने से परेशान होकर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष परिवार के साथ धरने पर बैठने की बात कही है। विक्रांत ने गैस कंपनी को मेल कर साफ कहा है कि यदि 25 दिनों के भीतर सिलिंडर की आपूर्ति नहीं हुई तो वे अनशन पर बैठ जाएंगे। यह मामला इस बात का संकेत है कि गैस संकट अब लोगों की सहनशीलता की सीमा पार कर चुका है और प्रशासनिक व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है।

एक सिलिंडर के लिए महीनों का इंतजार

विक्रांत कुमार के अनुसार उन्हें अंतिम बार 26 फरवरी को गैस सिलिंडर मिला था। इसके बाद उन्होंने कई बार बुकिंग की, लेकिन हर बार डिलीवरी की तारीख आगे बढ़ती गई। पहले 23 मार्च, फिर 2 अप्रैल और अब 12 अप्रैल की तारीख दी गई है। यह सिलसिला बताता है कि बुकिंग सिस्टम में पारदर्शिता और भरोसे की कमी है। विक्रांत का कहना है कि उनके घर में बिजली कनेक्शन भी नहीं है, जिससे वे इंडक्शन या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग नहीं कर सकते। ऐसे में गैस नहीं मिलना सीधे-सीधे उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है।

एजेंसियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

नाथनगर स्थित श्री साई बाबा गैस एजेंसी के संचालक ने इस मामले में साफ कहा कि जब तक उपभोक्ता का नंबर नहीं आएगा, तब तक सिलिंडर देना संभव नहीं है। उन्होंने शिकायत को जिला प्रशासन तक भेजने की बात कहकर अपनी जिम्मेदारी सीमित कर दी। इस तरह के जवाब से यह साफ होता है कि एजेंसियां वितरण की समस्या को अपनी जिम्मेदारी मानने से बच रही हैं। उपभोक्ता और एजेंसी के बीच जवाबदेही तय नहीं होने से समस्या और जटिल हो गई है।

ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम बना सिरदर्द

ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था, जिसे सुविधा के तौर पर शुरू किया गया था, अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बन गई है। बुकिंग के दौरान बार-बार “बाद में प्रयास करें” या “तारीख आगे बढ़ा दी गई है” जैसे संदेश मिल रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में असमंजस और नाराजगी दोनों बढ़ रही है। डिजिटल सिस्टम की यह स्थिति यह दर्शाती है कि तकनीकी सुधार के बावजूद जमीनी स्तर पर उसकी सही क्रियान्विति नहीं हो पा रही है।

कंट्रोल रूम की सीमित प्रभावशीलता

रसोई गैस आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने के लिए 16 मार्च से जिला कंट्रोल रूम 24 घंटे संचालित किया जा रहा है। तीन शिफ्टों में कर्मचारी तैनात हैं और शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। इसके बावजूद शिकायतों के निस्तारण की गति धीमी बनी हुई है। शुक्रवार को मिली शिकायतों में आदमपुर की राखी राय, शीतला स्थान की सुकन्या झा, खंजरपुर के प्रियम पराशर, मकंदपुर के गणेश कुमार और सुर्खीकल की इंदू देवी जैसे कई उपभोक्ताओं ने लंबे समय से गैस नहीं मिलने की बात कही। इन सभी मामलों में एक समानता है—लगातार इंतजार और अनिश्चितता।

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