अक्टूबर 2022 में श्री महाकाल महालोक के लोकार्पण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। सामान्य दिनों में एक से डेढ़ लाख और प्रमुख पर्वों पर चार से पांच लाख तक पहुंचने वाली भीड़ के बीच सुरक्षा, दर्शन व्यवस्था, यातायात और आपदा प्रबंधन प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
पारंपरिक पुलिस बल और सामान्य सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था पर्याप्त नहीं रह गई थी। इसी चुनौती ने महाकाल क्षेत्र में एआइ आधारित निगरानी प्रणाली ‘त्रिनेत्र’ को जन्म दिया, जिसे हाल ही में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
यह परियोजना केवल सुरक्षा व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच में आए बदलाव की कहानी है। महाकाल मंदिर समिति, जिला प्रशासन और तकनीकी एजेंसियों ने मिलकर ऐसी प्रणाली विकसित की, जो संभावित जोखिमों की पूर्व पहचान भी करती है।
भीड़ बढ़ी, तो बदला सुरक्षा का मॉडल
महाकाल महालोक शुरू होने के बाद दर्शन कतारों का दबाव, वीआइपी मूवमेंट, पार्किंग प्रबंधन, लापता श्रद्धालुओं की तलाश और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी जैसी चुनौतियां बढ़ने लगीं।
तत्कालीन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने महसूस किया कि पारंपरिक व्यवस्था भविष्य की जरूरतों के अनुरूप नहीं है। उनके नेतृत्व में एआइ आधारित निगरानी प्रणाली का खाका तैयार किया गया।
वर्ष 2023 में 5.25 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुई ‘त्रिनेत्र’ परियोजना के तहत महाकाल मंदिर, महाकाल लोक, रुद्रसागर क्षेत्र और प्रमुख मार्गों पर 700 से अधिक एआइ सक्षम कैमरे लगाए गए, जिन्हें इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा गया।
कैमरे केवल देखते नहीं, समझते भी हैं
त्रिनेत्र की सबसे बड़ी विशेषता इसकी वीडियो एनालिटिक्स क्षमता है। सिस्टम फेस रिकग्निशन, क्राउड डेंसिटी एनालिसिस, ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग और आटोमैटिक अलर्ट जैसी तकनीकों से लैस है।
किसी स्थान पर भीड़ बढ़ने, प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश या असामान्य गतिविधि होने पर कंट्रोल रूम को तत्काल सूचना मिल जाती है। इससे सुरक्षा दल घटना के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले सक्रिय हो सकते
सुरक्षा ही नहीं, परिणाम भी दिए
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार, इस प्रणाली की मदद से अब तक 600 से अधिक गुम श्रद्धालुओं को परिजनों से मिलवाया गया है। 53 लोगों का खोया सामान बरामद हुआ, चोरी की 10 घटनाओं का पता चला और पुलिस के सात मामलों की जांच में त्रिनेत्र की मदद ली गई।
सिंहस्थ-2028 की तैयारी का आधार
प्रशासन अब इस प्रणाली का विस्तार सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखकर कर रहा है। अनुमान है कि अगले सिंहस्थ में 10 से 15 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन पहुंच सकते हैं।
कलेक्टर रौशन कुमार सिंह के अनुसार सिस्टम को और उन्नत कर पूरे मेला क्षेत्र तक विस्तार देने की तैयारी चल रही है। भविष्य में यही व्यवस्था सिंहस्थ के डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की रीढ़ बन सकती है।
क्या है ‘त्रिनेत्र’?
- वर्ष 2023 में शुरू हुई एआइ आधारित निगरानी परियोजना
- कुल लागत : 5.25 करोड़ रुपये
- 700 से अधिक स्मार्ट हाई-रिजाल्यूशन कैमरे
- 24×7 इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर
- फेस रिकग्निशन और वीडियो एनालिटिक्स
- भीड़ घनत्व मापन और रियल टाइम अलर्ट
- प्रतिबंधित क्षेत्रों की स्मार्ट निगरानी
- 600 से अधिक गुम श्रद्धालुओं को मिलाने में मदद
- 53 लोगों का खोया सामान बरामद
- सिंहस्थ-2028 के लिए विस्तार और अपग्रेडेशन जारी


