एग्री स्टैक परियोजना के तहत चल रहे फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य सचिव स्तर पर हुई समीक्षा में भागलपुर जिले की प्रगति नगण्य पाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित कृषि अधिकारियों को चेतावनी जारी की है।
इस क्रम में जिला कृषि पदाधिकारी से स्पष्टीकरण पूछा गया है। वहीं, सबौर प्रखंड के प्रखंड कृषि पदाधिकारी (बीएओ) से 48 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है तथा उनका वेतन तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है।
जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि सरकार के निर्देश के आलोक में एग्री स्टैक परियोजना अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी कार्य मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। इसकी नियमित समीक्षा मुख्य सचिव के स्तर से की जा रही है।
एक जून को आयोजित समीक्षा बैठक एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में भागलपुर जिले की उपलब्धि अपेक्षा के अनुरूप नहीं पाई गई। इसे गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
जारी आदेश में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्य की दैनिक समीक्षा नहीं किए जाने के कारण प्रगति प्रभावित हुई है। इससे कार्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता परिलक्षित होती है।
जिलाधिकारी ने जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया है कि मुख्य सचिव द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई कर चार जून तक वे लक्ष्य के अनुरूप प्रगति सुनिश्चित करें। यदि निर्धारित अवधि तक अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए विभाग को अनुशंसा भेजी जाएगी।
जिला कृषि पदाधिकारी से कहा गया है कि कार्य की दैनिक मॉनिटरिंग और समीक्षा प्रभावी ढंग से नहीं की जा रही है, जिसके कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा है।
इस कार्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता का परिचायक बताते हुए जिला कृषि पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि मुख्य सचिव निर्देश के अनुरूप तत्काल आवश्यक कार्रवाई कर वे प्रगति में सुधार सुनिश्चित करें। चार जून तक अपेक्षित प्रगति नहीं दिखाई देती है तो आपके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई के लिए अनुशंसा विभाग को भेज दी जाएगी।
वहीं, सबौर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी को भेजे गए अलग पत्र में कहा गया है कि उनके प्रखंड में फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी कार्य की प्रगति अत्यंत धीमी है। इससे स्पष्ट होता है कि उन्होंने कार्य में अपेक्षित रुचि नहीं ली। इस कारण सरकारी योजना के क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
पत्र में उनसे पूछा गया है कि उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा क्यों नहीं की जाए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि स्पष्टीकरण प्राप्त होने और उसके संतोषजनक पाए जाने तक संबंधित अधिकारी का वेतन स्थगित रहेगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई को एग्री स्टैक परियोजना में तेजी लाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


