क्या जम्मू शहर एक बार फिर कूड़े के ढेर में तब्दील होने जा रहा है? यह सवाल इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि जम्मू नगर निगम और सफाई कर्मचारियों के बीच आर-पार की जंग छिड़ चुकी है। मुद्दा है गांधीनगर (जोन-3) की साफ-सफाई को ठेके पर देने का, जिसे कर्मचारी अपनी आजीविका पर सीधा हमला मान रहे हैं।
म्यूनिसिपल वर्कर्स यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर निगम ने अपनी एनजीओ प्रथा नहीं रोकी, तो 9 जून से पूरे जम्मू में पूर्ण हड़ताल कर दी जाएगी। नगर निगम ने जम्मू के सबसे पाश इलाकों में शुमार गांधीनगर (जोन-3) के सभी 26 वार्डों की सफाई व्यवस्था को प्राइवेट हाथों में सौंपने के लिए टेंडर जारी कर दिए हैं। यह टेंडर 15-16 जून को खुलने हैं।
लेकिन यूनियन का कहना है कि वे इस निजीकरण को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह पहली बार नहीं है जब निगम ने ऐसा दांव खेला हो। साल 2024 में भी भारी विरोध के चलते प्रशासन को यह फैसला वापस लेकर ठंडे बस्ते में डालना पड़ा था। अब दोबारा उसी चिंगारी को हवा दे दी गई है।
9 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल
यूनियन के प्रधान रिंकू गिल ने प्रशासन को घेरने के लिए पूरा एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। उन्होंने मंगलवार को नगर निगम आयुक्त डा. देवांश यादव के अलावा डिवीजनल कमिश्नर जम्मू रमेश कुमार, आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त सचिव मंदीप कौर और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस संबंध में पत्र भेज दिया है।
उन्होंने कहना है कि अगर एनजीओ प्रथा खत्म नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन होकर रहेगा। गिल ने कहा कि 6 जून शनिवार और 8 जून सोमवार को टाउन हाल में एकत्र होकर सफाई कर्मचारी प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 9 जून से सारे शहर में साफ-सफाई ठप कर दी जाएगी और हड़ताल शुरू होगी। यह हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक कोई फैसला नहीं होता। निगम प्रशासन जल्द जोन-3 के टेंडर को रद करते हुए एनजीओ प्रथा की दिशा में कदम बढ़ाए। इससे पहले
सियासत बनाम सफाई
26 मई को भी सफाई कर्मचारियों ने निगम आयुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। कर्मचारियों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब वे दिन-रात शहर को चमकाने में लगे हैं, तो निगम एनजीओ और ठेकेदारों की जेबें भरने में क्यों दिलचस्पी दिखा रहा है। यूनियन प्रधान रिंकू गिल ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि 15-16 जून को टेंडर खुलने से पहले निगम को यह फैसला रद्द करना ही होगा। अगर 9 जून से जम्मू में गंदगी का अंबार लगता है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ निगम प्रशासन की होगी।


