प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर नगर निगम की नीतियों पर नागरिकों ने नाराजगी जताते हुए प्रशासन के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। समाजसेवी आर.के. गर्ग ने कहा कि एक ओर आम नागरिकों के लिए 20 प्रतिशत टैक्स छूट समाप्त कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर बकाया राशि पर 25 प्रतिशत तक जुर्माना और 12.5 प्रतिशत ब्याज का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रॉपर्टी के नियमितीकरण और दस्तावेजी प्रक्रियाओं के लिए दबाव बनाया जा रहा है तथा पानी के कनेक्शन काटने जैसी चेतावनियां भी दी जा रही हैं। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन का उद्देश्य नागरिकों को राहत देने के बजाय उन पर दंडात्मक कार्रवाई करना बन गया है।
आर.के. गर्ग ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि कई सरकारी विभाग और कार्यालय स्वयं वर्षों से प्रॉपर्टी टैक्स के बकायेदार हैं, लेकिन उनके प्रति नरम रवैया अपनाया जाता है, जबकि समय पर टैक्स जमा करने वाले आम नागरिकों को नोटिस, जुर्माने और सख्ती का सामना करना पड़ता है। उन्होंने पूछा कि क्या नियम केवल आम जनता के लिए हैं और सरकारी संस्थानों के लिए अलग व्यवस्था लागू है?
उन्होंने कहा कि पहले टैक्स छूट में बदलाव चरणबद्ध तरीके से किए जाते थे, लेकिन अब अचानक राहत समाप्त कर नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया गया है। नागरिकों ने इस कथित दोहरे मापदंड और दंडात्मक नीति का विरोध करते हुए प्रशासन से न्यायपूर्ण, समान और संवेदनशील व्यवस्था अपनाने की मांग की है।
गर्ग ने कहा कि प्रशासन को सबसे पहले सरकारी विभागों और संस्थानों से लंबित बकाया वसूलना चाहिए। इसके बाद ही आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को राहत और सहयोग की आवश्यकता है, न कि उत्पीड़न और धमकियों की।


