केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पर्यटक व स्थानीय निवासी अब भारत निर्मित विदेशी शराब का आनंद ले सकेंगे। नशीले पदार्थों के सेवन में हो रही वृद्धि पर रोक लगाने के अभियान के तहत उपराज्यपाल प्रशासन ने नई एक्साइज नीति के तहत लोगों को कम अल्कोहलिक मात्रा वाली शराब का सेवन करने का विकल्प दिया है।
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने लद्दाख के लिए नई एक्साइस पालिसी की घोषणा कर न सिर्फ प्रदेश में शराब की दुकानों की संख्या बढ़ाने के साथ लाइसेंस लेने वाले गेस्ट हाउस व होमस्टे में भी पर्यटकों के लिए शराब उपलब्ध करवाने का अहम फैसला किया है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पहले केवल बीयर, वाइन व रेडी टू ड्रिंक बिवरेज की बिक्री की ही अनुमति थी। पहले पर्यटक, लोग सिर्फ होटल परिसर के अंदर ही पी सकते थे।
पहले लद्दाख आने वाले कई पर्यटक साथ में शराब लाते थे। इससे शराब की अवैध बिग्री को भी बढ़ावा मिलता था। अब उत्पाद शुल्क की चोरी रोकने, पता लगाने की क्षमता को मजबूत करने के लिए, शराब निर्माताओं व आयातकों को उत्पाद शुल्क विभाग द्वारा अनुमोदित सुरक्षा होलोग्राम को शराब उत्पादों पर लगाना अनिवार्य होगा। पर्यावरण संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, नई नीति प्लास्टिक की बोतलों में शराब की बिक्री पर भी रोक लगाएगी। शराब केवल अनुमोदित कांच की बोतलों, पीईटी बोतलों व टिन के डिब्बों में ही बेची जाएगी।
इस समय लद्दाख में बीयर, वाइन की बिक्री के लिए दो दुकानें हैं। अब नई एक्साइज नीति के तहत लोगों के लिए दृरदराज इलाकों में भी शराब उपलब्ध करवाने के लिए इ निलामी के जरिए बीस नई दुकाने खोलने की अनुमति दी जाएगी। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या घटाकर मात्र 6 कर दिया गया है।
इस तरह मिलेगी शराब परोसने की अनुमति
पहले इसके लिए 16 दस्तावेजों की आवश्यकता होती थी। अब लाइसेंस जारी करने के लिए जिला प्रशासन की अनुमति की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है। इसमें कई महीने लग जाते थे। अब निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद निजी स्थानों पर विशेष अवसरों, भोजगृहों या पार्टी हालों में शराब परोसने की अनुमति दी गई है। पहले इसकी अनुमति नहीं थी।
अब शराब निर्माताओं को थोक वितरण करने की अनुमति दी जाएगी। इससे लद्दाख में गुणवत्तापूर्ण ब्रांडों की उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा व आपूर्ति श्रृंखला में सुधार होगा। थोक व खुदरा स्तर पर एक ही शुल्क प्रणाली लागू करते हुए एक सरलीकृत शुल्क संरचना प्रस्तुत की गई है।
राजस्व वृद्धि के सभी भारत निर्मित विदेशी शराब के ब्रांडों पर लीटर पर अल्कोहल (एलपीएल) 500 रुपये का एक समान उत्पाद शुल्क निर्धारित किया गया है।
उत्पाद शुल्क राजस्व को अधिकतम करने के लिए, थोक लाइसेंस का वार्षिक शुल्क मौजूदा 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके साथ खुदरा दुकानों के लिए भी आधार मूल्य में संशोधन किया गया है। लेह नगर निगम के वार्डों में आधार मूल्य 60 लाख रुपये तय किया गया है। वहीं अन्य क्षेत्रों में यह 30 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। नई लाइसेंस नीति में खुदरा विक्रेताओं का लाभ मार्जिन भी मौजूदा 12 प्रतिशत से घटकर 10प्रतिशत हो गया है। नई उत्पाद शुल्क नीति ने मौजूदा व्यवस्था को विनियमित करके एक बड़ा सुधार किया है।
अब केवल जीएसटी पंजीकरण ही पर्याप्त होगा
पहले होटलों को शराब का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पर्यटन पंजीकरण अनिवार्य था। लेकिन अब, उत्पाद शुल्क लाइसेंस प्राप्त करने के लिए केवल जीएसटी पंजीकरण ही पर्याप्त होगा। हालांकि, जीएसटी में पंजीकृत न होने वाले होटलों को पर्यटन पंजीकरण देना होगा। उपराज्पाल ने कहा है कि संशोधित उत्पाद शुल्क नीति का उद्देश्य एक संतुलित व व्यावहारिक ढांचा स्थापित करना है जो जनता की चिंताओं को दूर करे। यह पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों को सुगम बनाए व अवैध व्यापार को रोके।
इसी बीच उत्पाद शुल्क नीति में कड़े प्रवर्तन व उपभोक्ता संरक्षण उपाय भी शामिल हैं। अधिकतम खुदरा मूल्य ( से अधिक कीमत पर शराब बेचने वाले खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने व जब्त करने सहित कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। नई नीति में यह प्रावधान है कि लाइसेंसधारक शराब के कारोबार में सहायता के लिए 21 वर्ष से अधिक आयु के किसी भी व्यक्ति को नियुक्त कर सकते हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
नीति में आगे यह भी प्रावधान है कि भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों व सार्वजनिक उद्यानों से 100 मीटर की दूरी से संबंधित निर्धारित मानदंडों का अनुपालन सुनिश्चित करने के बाद ही खुदरा दुकानें स्थापित की जाएंगी।


