आसरेवाली क्षेत्र में खैर के पेड़ चोरी मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो डीएफओ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वन मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई हाईलेवल समीक्षा बैठक के बाद निलंबन के आदेश जारी किए गए।
निलंबित अधिकारियों में डीएफओ (वाइल्ड लाइफ) राजेंद्र प्रसाद डांगी और डीएफओ (टेरिटोरियल) विशाल कौशिक शामिल हैं। इससे पहले वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत भी निलंबित है। वन विभाग के दरोगा रघुविंद्र को भी निलंबित किया जा चुका है। रघुविंद्र को एसआईटी गिरफ्तार कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार समीक्षा बैठक में विभागीय लापरवाही और संभावित मिलीभगत के संकेत मिलने के बाद यह सख्त कार्रवाई की गई। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी निलंबित अधिकारियों को जांच पूरी होने तक मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
उधर, इस मामले की जांच कर रही एसआईटी अब तक 11 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और पूछताछ जारी है। माना जा रहा है कि जांच के दायरे में और भी अधिकारी आ सकते हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई हो सकती है।
थाना रायपुररानी पुलिस ने खैर पेड़ों के सौदे में कथित ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए महंत कृष्णानंद उर्फ अश्वनी कुमार (61) को गिरफ्तार किया है। आरोपति के खिलाफ पहले ही धारा 406, 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।
एसएचओ प्रीतम सिंह ने बताया कि यमुनानगर निवासी शिकायतकर्ता हर्षित सिंगला ने आरोप लगाया था कि आरोपति ने अपने साथी अमित कुमार के साथ मिलकर खैर पेड़ों की कटाई के नाम पर करीब 10 लाख रुपये हड़प लिए।
आरोप है कि सौदे के समय यह तथ्य छिपाया गया कि संबंधित जमीन हाईकोर्ट में विचाराधीन है और उस पर कटाई की अनुमति नहीं है। जांच में सामने आया कि आरोपितों ने जानबूझकर गलत जानकारी देकर रकम ली। शिकायतकर्ता ने नकद और चेक के माध्यम से भुगतान किया था। बाद में जब सच्चाई सामने आई तो आरोपितों ने कथित तौर पर धमकियां भी दीं।
एसएचओ प्रीतम सिंह और जांच अधिकारी धनीराम ने 20 मार्च 2026 को आरोपित को गिरफ्तार कर 24 मार्च तक का पुलिस रिमांड हासिल किया है। पूछताछ में आरोपित ने कबूल किया है कि ठगी की रकम हरिद्वार और नीलकंठ क्षेत्र में रखी गई है, जिसे बरामद किया जाना है। साथ ही उसके साथी अमित को भी गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।


