‘सिस्टम में खराबी नहीं, सिर्फ इक्का-दुक्का ही शिकायतें’, CBSE रिजल्ट के विवाद पर बोली OSM करने वाली कंपनी

CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम को लेकर बढ़ते विवाद के बीच हैदराबाद स्थित Coempt Edu Tech के CEO वीएसएन राजू ने डिजिटल मूल्यांकन प्लेटफॉर्म का बचाव किया है।

उनका दावा है कि ऐसी इक्का-दुक्का शिकायतें ही आई हैं। इन शिकायतों से पूरे सिस्टम को फेल नहीं कहा सकता है। वीएसएन राजू ने कहा कि ऐसा नहीं है कि पूरा सिस्टम ही गलत है या बहुत सारी समस्याएं सामने आई हैं। यह आरोप बिलकुल भी सही नहीं हैं।

वेदांत श्रीवास्तव के केस में स्कैनिंग में हुई गलती

दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव के केस में स्कैनिंग की गलती बताई जा रही है। वेदांत ने सोशल मीडिया में कहा था कि उनकी फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका, उनकी नहीं थी। कई छात्रों ने पन्ने बदल दिए जाने, स्कैन की क्वालिटी ठीक नहीं होने और आंसर शीट को देखने में आ रहीं दिक्कतों की भी शिकायत की थी।

इस मामले पर राजू ने कहा कि जांच में तकनीकी खामी सामने नहीं आई है, बल्कि स्कैनिंग के दौरान की गलती सामने आई है। यह पता लगा लिया है कि स्कैनिंग कहां हुई और किसने की। तकनीकी रूप से कोई गलती नहीं मिली है। जांच जारी है।

यह भी दावा किया कि लगभग 95 प्रतिशत छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की कॉपी मिल चुकी है और कंपनी द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे स्कैनर इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के हैं।

हैकिंग सिर्फ टेस्टिंग सर्वर तक सीमित

एक 19 वर्षीय एथिकल हैकर ने दावा किया था कि उसने प्लेटफॉर्म में सेंध लगाई और सुरक्षा की कमियां सामने लाईं। इस पर कहा कि मुख्य CBSE सर्वर हैक नहीं हुआ था।

जिस सर्वर तक पहुंच बनाई गई, वह केवल टेस्टिंग के लिए इस्तेमाल होता है। उसमें डमी टेस्ट चलते हैं और उसका सार्वजनिक एक्सेस होता है। उसका किसी क्लाइंट के डेटा से संबंध नहीं है।

सीमित पायलट रन के आरोपों से इनकार करते हुए राजू ने उन रिपोर्टों को भी गलत बताया, जिनमें कहा गया था कि CBSE ने सीमित पायलट प्रोजेक्ट में ही पूरे देश में OSM लागू कर दिया।

बल्कि जनवरी के मध्य से देशभर में कई ड्राई रन किए गए थे और एक दिन में 40,000 तक शिक्षकों ने ऑनलाइन मूल्यांकन अभ्यास में हिस्सा लिया।

फिर चर्चा में तेलंगाना 2019 परीक्षा विवाद

कंपनी का नाम एक बार फिर 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद से जोड़ा जा रहा है। उस समय 3.8 लाख से अधिक छात्र फेल हुए थे और मूल्यांकन व प्रशासनिक गड़बड़ियों के आरोप लगे थे। इस विवाद के दौरान 20 से अधिक छात्रों की मौत हुई थी।

तब इस प्रक्रिया से जुड़ी कंपनी का नाम Globarena Technologies था, जिसने बाद में अपना नाम बदलकर Coempt Edu Tech कर लिया।

नाम बदलने पर उठे सवालों पर राजू ने कहा कि हम अपना नाम बदल चुके हैं, हमारे सभी क्लाइंट यह जानते हैं और मैं अब भी CEO हूं। हम कुछ छिपा नहीं रहे।उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने कंपनी को राहत दी थी।

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