नई दिल्ली: भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश के 104 हवाईअड्डे अब पूरी तरह ग्रीन ऊर्जा (Green Energy) से संचालित हो रहे हैं। यह पहल भारत के 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इन हवाईअड्डों पर बिजली की जरूरत सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से पूरी की जा रही है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता और परिचालन लागत में भी सुधार होने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि हवाईअड्डों को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र, ऊर्जा-कुशल प्रकाश व्यवस्था, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन और हरित अवसंरचना जैसी कई पहलें लागू की गई हैं। इन प्रयासों का उद्देश्य विमानन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।
भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत ऊर्जा, परिवहन, उद्योग और विमानन समेत विभिन्न क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी से संचालित हवाईअड्डों की बढ़ती संख्या इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विमानन क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि भविष्य में ऊर्जा लागत कम करने और सतत विकास को गति देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

विकास कुमार सिंह एक अनुभवी भारतीय पत्रकार और द टकसाल न्यूज़ (The Taksal News) के प्रधान संपादक हैं।

