गोरखपुर में त्योहारों से पहले मौसम की मार, टेराकोटा शिल्पकारों की बढ़ी बेचैनी

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दीपावली और दशहरा की तैयारियों के बीच टेराकोटा शिल्पकारों का काम तेज गति से चल रहा है। विभिन्न राज्यों से मिले आर्डर की आपूर्ति समय हो सके। इसके लिए शिल्पकार और कारीगर मिट्टी को आकार देने में जुटे हैं।

इसी बीच मौसम का बदला मिजाज शिल्पकारों की चिंता बढ़ा रहा है। आंधी और वर्षा के कारण मिट्टी से बनी कलाकृतियों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। शिल्पकारों का कहना है कि अभी इतने बड़े गाेदाम नहीं है कि जहां पर एक साथ पकी और कच्ची कलाकृतियों को सहेजा जा सके।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रोत्साहन से टेराकोटा शिल्पकारों का काम बढ़ गया है। एक जिला एक उत्पाद में शामिल होने के बाद से अहमदाबाद, हैदराबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली व राजस्थान के कई शहरों से आर्डर आने लगे हैं। दीपावली के पहले ही कई ट्रकों से टेराकोटा उत्पादों की आपूर्ति की जा चुकी है।

भेजे गए सामान में बड़ी संख्या दीपावली और दशहरा से जुड़ी कलाकृतियों की है। लगड़ी गुलरिहा के राजन प्रजापति अभी तक छह छोटे ट्रक से सामान भेज चुके हैं। धूपदानी, पान दीपक, कढ़ाही, हाथी दीप और घोड़ा समेत कई प्रकार की कलाकृतियों के बड़े आर्डर मिले हैं।

मानसून शुरू होने के बाद काम करना कठिन हो जाता है, इसलिए अभी से अधिक से अधिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि बदलते मौसम के बीच उनके जैसे अन्य शिल्पकार मौसम संबंधी सूचनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सोमवार रात मौसम खराब होने का संदेश मोबाइल फोन पर मिलने के बाद खुले में सूखने के लिए रखी कलाकृतियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया गया। इससे बड़े नुकसान से राहत मिल गई।

रविंद्र प्रजापति, नागेंद्र, कृष्ण मुरारी, सूरज निषाद, संध्या देवी और रमावती ने बताया कि आने वाले दिनों में आंधी और वर्षा का क्रम बढ़ा तो मिट्टी की कलाकृतियों को सुखाने में अधिक समय लगेगा। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

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