इंजीनिरिंग का कमाल: नहर के ऊपर से गुजरेगी कंक्रीट की पाइपलाइन

शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से मूड़ाखेड़ा तक प्रीस्ट्रेस्ट सिलेंडिरकल कंक्रीट पाइप (पीसीसीपी) बिछाने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। 13 किलोमीटर तक पीसीसीपी बिछाने का काम हो गया है। ऊपरी गंगा नहर और समानांतर गंगा नहर पर स्टील के पुल से पीसीसीपी निकलेगी। छह रजवाहों से ट्रेंच विधि से पीसीसीपी डाली जाएगी। निर्माण

कार्य पूरा होते ही एसटीपी के 40 मेगालीटर/ प्रतिदिन पानी से टीएचडीसी प्लांट में विद्युत उत्पादन शुरू हो जाएगा। शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट(एसटीपी) से मूंडाखेड़ा नहर तक प्रीस्ट्रेस्ट सिलेंडिरकल कंक्रीट पाइप (पीसीसीपी) बिछाने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। 19 किलोमीटर लंबाई की प्रीस्ट्रेस्ट सिलेंडिरकल कंक्रीट पाइप बिछाई जानी है। अभी तक 13 किलोमीटर पीसीसीपी बिछाने का काम पूरा किया जा चुका है।

ऊपरी गंगा नहर और समानांतर गंगा नहर के ऊपर से माइल्ड स्टील का पुल से पाइप लाइन को निकालने का डिजाइन में देरी होने के कारण थोड़ा विलंब हुआ है। पीसीसीपी दो नहरों के ऊपर अौर पांच-छह रजवाहों के नीचे से ट्रेंच विधि के माध्यम से पाइप लाइन निकाली जाएगी। जिस कारण थोड़ा विलंब हुआ है।

सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से मूंडाखेड़ा गंगा नहर तक पीसीसीपी लाइन बनाई जाएगी। पीसीसी बिछाने पर 64 करोड़ रुपये की धनराशि खर्च होगी।। हालांकि टीएचडीसी ने मूंडाखेड़ा गंगा नहर पुल से अरनियां थर्मल पावर प्लांट तक पाइप लाइन पहले ही बना ली है। ऊपरी गंगा नहर से प्लांट को जलापूर्ति के लिए नहर को पक्की करने का काम पिछले दिनों पूरा हुआ था। हालांकि प्लांट को ऊपरी गंगा नहर से पानी की आपूर्ति समानांतर गंगा नहर से की जाएगी।

दिसंबर के अंत पीसीसीपी बिछाने का काम पूरा हो जाएगा। नए साल में एसटीपी से 40 मेगालीटर/ प्रतिदिन पानी से टीएचडीसी प्लांट को सप्लाई किया जाएगा। एसटीपी के पानी से उच्च तापीय थर्मल पावर प्लांट में विद्युत उत्पादन होगा।

दिसंबर तक पीसीसीपी बिछाने का काम पूरा हो जाएगा
शहर के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से मूड़ाखेड़ा नहर तक 13 किलोमीटर प्रीस्ट्रेस्ट सिलेंडिरकल कंक्रीट पाइप (पीसीसीपी) बिछाने का काम पूरा हो चुका है। ऊपरी गंगा नहर और समानांतर गंगा नहर के ऊपर से लोहे के पुल से पीसीसी को निकाला जाएगा। जबकि पांच-छह रजवाहों के नीचे से पीसीसीपी निकाली जाएगी। दिसंबर तक पीसीसीपी बिछाने का काम पूरा हो जाएगा। – आशीष खेवरिया, एक्सईएन जल निगम

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