चंडीमंदिर सैन्य स्टेशन में मंगलवार को भारतीय सेना की पश्चिमी कमान को नया रणनीतिक नेतृत्व मिला। लेफ्टिनेंट जनरल हरजीत सिंह साही ने पश्चिमी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ का पदभार संभाल लिया।
सेना के भीतर उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने मैदान से लेकर ‘वार रूम’ तक हर स्तर पर अपनी क्षमता साबित की है। लेफ्टिनेंट जनरल साही ऐसे समय में पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जब देश की पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर सुरक्षा चुनौतियां लगातार बदल रही हैं।
सीमा सुरक्षा, तकनीकी युद्ध, सूचना युद्ध और आतंकवाद विरोधी अभियानों का उनका लंबा अनुभव अब पश्चिमी कमान की रणनीतियों को नई दिशा देगा। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल पुनीत आहूजा का स्थान लिया है, जिन्हें सेना मुख्यालय में महानिदेशक रणनीतिक योजना की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सियाचिन से मणिपुर तक ऑपरेशनल अनुभव
पंजाब पब्लिक स्कूल, नाभा और भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से शिक्षा प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल साही को दिसंबर 1988 में राजपूत रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में कमीशन मिला था। तीन दशक से अधिक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।
सियाचिन ग्लेशियर जैसी दुनिया की सबसे कठिन तैनाती से लेकर जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद विरोधी अभियानों तक, उन्होंने हर मोर्चे पर नेतृत्व किया। उन्होंने काउंटर इंसर्जेंसी फोर्स ‘किलो’ में अपनी बटालियन और इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में भारतीय सेना की सबसे बड़ी कोर – ‘3 कोर’ की कमान शामिल है।
यह कोर पूर्वी सीमाओं, भारत-म्यांमार सीमा और उत्तर-पूर्व के छह राज्यों की सुरक्षा संभालती है। मई 2023 में मणिपुर में भड़की जातीय हिंसा के दौरान उन्होंने हालात को स्थिर करने और सैन्य आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी।
‘इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर’ के भी विशेषज्ञ
लेफ्टिनेंट जनरल साही सिर्फ मैदान के कमांडर ही नहीं, बल्कि आधुनिक सैन्य रणनीति और सूचना युद्ध के भी विशेषज्ञ माने जाते हैं। सेना मुख्यालय में वे महानिदेशक सूचना युद्ध जैसी अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
आज के दौर में युद्ध सिर्फ सीमा पर हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, साइबर नेटवर्क और सूचनाओं के जरिए भी लड़ा जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को पश्चिमी कमान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। उन्होंने अतिरिक्त महानिदेशक सैन्य संचालन और ऑपरेशनल कोर में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ जैसे अहम पदों पर भी काम किया है।
आर्मी वॉर कॉलेज को दिलाया राष्ट्रीय सम्मान
पश्चिमी कमान में आने से पहले वे आर्मी वॉर कॉलेज, महू के कमांडेंट थे। उनके कार्यकाल में सैन्य शिक्षा को आधुनिक तकनीक और बदलती युद्ध जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया।
उनके नेतृत्व में संस्थान को 15 जनवरी, 2026 को ‘चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ यूनिट अप्रिसिएशन’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। सेना के भीतर इसे उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच का बड़ा प्रमाण माना जाता है।
दो एमफिल, रणनीतिक अध्ययन में महारत
लेफ्टिनेंट जनरल साही ने डीएसएससी वेलिंगटन, हायर कमांड कोर्स और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित सैन्य पाठ्यक्रम पूरे किए हैं। उनके पास दो एमफिल डिग्रियां और रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में मास्टर डिग्री भी है।
उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल और सेना मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।
पदभार संभालने के बाद उन्होंने वीर स्मृति युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी और परिचालन तत्परता, सैन्य क्षमता बढ़ाने तथा सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।


