झारखंड जेटेट से भोजपुरी-मैथिली के साथ चार जनजातीय भाषाएं भी हटाई गईं, विरोध एकतरफा क्यों?

एक ओर केंद्र और राज्य सरकार स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा देने की बातें
करती है और समय-समय पर इसके लिए अभियान भी चलाती है। दूसरी ओर, सरकार के कुछ अधिकारियों की लापरवाही से सारे प्रयास धरे के धरे रह जाते हैं।

झारखंड में भी भाषा विवाद के क्रम में कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। यहां चार क्षेत्रीय भाषाओं और चार की संख्या में ही जनजातीय भाषाओं को जे-टेट की सूची से बाहर कर दिया गया है।

इसका परिणाम यह है कि क्षेत्रीय भाषाओं को वापस शामिल कराने के लिए तीन मंत्रियों समेत कई विधायक सामने आए हैं लेकिन जनजातीय भाषाओं के लिए कोई सामने नहीं आ रहा है।

आश्चर्यजनक रूप से इसके पीछे वोट बैंक की राजनीति है। झारखंड में चार क्षेत्रीय भाषाओं मगही, मैथिली, अंगिका और भोजपुरी को जेटेट की सूची से हटाने का विरोध ताे हो रहा है।

यहां तक कि कैबिनेट की बैठक में कांग्रेस कोटे के दो मंत्रियों ने पूरे मसले पर प्रस्तावित नियमावली का विरोध किया। भाषा विवाद शुरू होते ही राज्य में इसके निदान के लिए चार मंत्रियों की कमेटी बनी जिसमें कांग्रेस के दो मंत्री रहे तो एक राजद और एक झामुमो के मंत्री हैं।

इनकी दो बैठकें होकर समाप्त भी हो चुकी हैं लेकिन जनजातीय भाषाओं के लिए एक को छोड़कर किसी ने चिंता नहीं की। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह यदा-कदा इसके लिए सवाल उठाते रहती हैं।

असुर, बिरहोर, भूमिज, माल्तो आदि भाषाओं को भी जेटेट की सूची से हटाया गया, लेकिन, इनके लिए कोई बोलनेवाला भी नहीं है। अब तो एक दशक से अधिक समय से इन भाषाओं को जनजातीय भाषाओं की सूची से अलग कर दिया गया है।

जिलों से कब-कब किन-किन भाषाओं को हटाया गया

रांची : भूमिज भाषा को जोड़ा गया
लोहरदगा : 2016 में असुर, बिरहाेर भाषा को हटाया गया
प. सिंहभूम : 2016 में भूमिज भाषा को हटाया गया
लातेहार : 2016 में असुर के साथ-साथ मगही एवं भोजपुरी को हटाया गया
पलामू : 2016 में ही असुर के साथ-साथ मगही एवं भोजपुरी को हटाया गया
गढ़वा : 2016 में क्षेत्रीय भाषाओं की श्रेणी से मगही, भोजपुरी को हटाया गया
दुमका : 2016 में माल्ताे और अंगिका को हटाया गया
जामताड़ा : अंगिका को हटाया गया
साहेबगंज : माल्तो एवं अंगिका को हटाया गया
पाकुड़ : माल्तो एवं अंगिका को हटाया गया
गोड्डा : माल्तो एवं अंगिका को हटाया
हजारीबाग : बिरहोर को हटाया गया
कोडरमा : कोई छेड़छाड़ नहीं
चतरा : बिरहाेर को हटाया गया
बोकारो : कोई छेड़छाड़ नहीं
धनबाद : कोई छेड़छाड़ नहीं
गिरिडीह : कोई छेड़छाड़ नहीं
देवघर : अंगिका को हटाया गया
रामगढ़ : बिरहोर को हटाया गया
खूंटी : कोई छेड़छाड़ नहीं

एक दशक पहले से ही हटा दी गई कई भाषा

राज्य के जिन 14 जिलों में से क्षेत्रीय भाषाओं की सूची को अपडेट किया गया है उन जिलों में लगभग एक दशक पहले 2016 में ही भाषाओं को हटा दिया गया था।

राजनीतिक दल इसे जानबूझकर की गई छेड़खानी मान तो रहे हैं लेकिन अभी कोई आवाज नहीं उठा रहा है।

कमेटी में जनजातीय समुदाय के प्रतिनिधि नहीं

भाषा विवाद को लेकर बनी मंत्रियों की कमेटी में एक भी जनजातीय समुदाय का प्रतिनिधि नहीं है। इस बात को झामुमो के मंत्री और कमेटी के सदस्य सुदिव्य कुमार सोनू ने उठाया भी है।

कमेटी के संयोजक वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने सभी मंत्रियों से प्राप्त अनुशंसाओं को सीधे मुख्यमंत्री के पास भेज दिया है जिसपर अब कैबिनेट की बैठक में फैसला होगा।

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