पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन को उनके पिता की 24वीं पुण्यतिथि पर नजरबंद कर दिया गया है। लोन ने यह जानकारी अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दी।
उन्होंने लिखा कि मैं और मेरे साथी आज शहीदों के कब्रिस्तान जाने वाले थे ताकि अपने पिता अब्दुल गनी लोन के लिए ‘फ़ातिहा’ पढ़ सकें। उन्हें 22 साल पहले 21 मई को आतंकवादियों ने शहीद कर दिया था। लेकिन आज सुबह-सुबह पुलिस आई और मुझे बताया कि मुझे ‘नज़रबंद’ (house arrest) कर दिया गया है। हंदवाड़ा स्थित हमारे दफ़्तर में भी इसी तरह की एक सभा होनी थी। पुलिस ने उस कार्यालय में भी हमारे जाने पर रोक लगा दी है।
आपको बता दें कि 21 मई 2002 को आतंकवादियों ने अब्दुल गनी लोन की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी थी जब वह मीरवाइज मौलवी मोहम्मद फारूक को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की रैली से लौट रहे थे। मीरवाइज फारूक की भी इसी दिन 12 साल पहले, 21 मई 1990 को आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने एक बयान जारी कर अपने अध्यक्ष और हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने कहा, “जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस शहीद अब्दुल गनी लोन की पुण्यतिथि पर अपने अध्यक्ष और विधायक हंदवाड़ा सज्जाद गनी लोन की नजरबंदी की कड़ी निंदा करती है।”
प्रशासन की यह कार्रवाई अलोकतांत्रिक
पार्टी ने इस कार्रवाई को अलोकतांत्रिक करार दिया। बयान में कहा गया कि प्रशासन का यह कदम जनभावनाओं को ठेस पहुंचाता है और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करता है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने आरोप लगाया कि हर साल अब्दुल गनी लोन की बरसी पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उन्हें श्रद्धांजलि देने से रोका जाता है।
आपको यह जानकारी भी हो कि अब्दुल गनी लोन कश्मीर के वरिष्ठ अलगाववादी नेता और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के संस्थापक थे। उनकी हत्या ईदगाह मैदान में हुई थी। हर साल 21 मई को उनकी बरसी पर श्रीनगर के ईदगाह स्थित मजार पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
पार्टी ने प्रशासन से सज्जाद लोन की नजरबंदी तुरंत खत्म करने और शांतिपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अनुमति देने की मांग की है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का कहना है कि शहीदों को याद करना लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे दबाया नहीं जाना चाहिए।


