पूर्णिया का ऐसा जनरल स्टोर, जहां गुटखा, तंबाकू और सिगरेट नहीं बिकती, मकसद है समाज को नशामुक्त रखना

आज के दौर में जहां गांव से लेकर शहर तक छोटी-बड़ी दुकानों में गुटखा, तंबाकू, बीड़ी-सिगरेट और अन्य नशीले उत्पादों की बिक्री आम बात हो चुकी है, वहीं धमदाहा प्रखंड के दुर्गापुर गांव में एक ऐसा जनरल स्टोर है जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है। यहां दुकान चलाने वाला परिवार न केवल खुद हर प्रकार के नशे से दूर है, बल्कि गांव के लोगों को भी नशामुक्त जीवन जीने के लिए लगातार प्रेरित कर रहा है।

परिवार की दूरदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी

दुर्गापुर गांव निवासी विजेंदर कुमार अपने घर के सामने वर्षों से जनरल स्टोर चला रहे हैं। उनकी दुकान पर रोजमर्रा की लगभग सभी आवश्यक चीजें मिलती हैं, लेकिन एक चीज बिल्कुल नहीं मिलती—किसी भी प्रकार का नशे का सामान। न गुटखा, न तंबाकू, न पान मसाला, न बीड़ी-सिगरेट और यहां तक कि कोल्ड ड्रिंक भी इस दुकान पर नहीं बेची जाती।

विजेंदर कुमार ने बताया कि करीब 10 वर्ष पहले उनके पिता ने एक छोटी गुमटी से यह दुकान शुरू की थी। उस समय भी उन्होंने यह संकल्प लिया कि दुकान में नशे से जुड़ा कोई सामान नहीं रखा जाएगा। पिता की इसी सोच और संस्कार को आज पूरा परिवार आगे बढ़ा रहा है।

विजेंदर कुमार कहते हैं, “हम लोग खुद भी किसी प्रकार का नशा नहीं करते और कोशिश रहती है कि गांव के लोग भी इससे दूर रहें। नशा परिवार और समाज दोनों को बर्बाद करता है। दुकान से थोड़ी अधिक कमाई संभव थी, लेकिन समाज को गलत रास्ता दिखाकर कमाया गया पैसा हमें मंजूर नहीं।”

युवाओं और ग्रामीणों में जागरूकता फैलाना

ग्रामीणों का कहना है कि विजेंदर कुमार का परिवार गांव में सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल बन चुका है। कई बार युवा और बच्चे दुकान पर गुटखा या सिगरेट मांगने पहुंचे, लेकिन उन्हें सामान देने के बजाय नशे से होने वाले नुकसान के बारे में समझाया गया।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि आज अधिकांश दुकानदार केवल अधिक मुनाफे के लिए नशे के उत्पाद बेचने में लगे हैं। ऐसे समय में विजेंदर कुमार जैसे लोग समाज को नई दिशा देने का काम कर रहे हैं। उनका यह प्रयास खासकर युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने में काफी प्रभावी साबित हो रहा है।

नशामुक्त समाज की दिशा में प्रेरक कदम

विजेंदर कुमार का यह निर्णय छोटे पैमाने पर ही सही, लेकिन पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन चुका है। लोग उनके इस नैतिक फैसले की सराहना कर रहे हैं और इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बता रहे हैं।

इस पहल का असर अब केवल दुकान तक सीमित नहीं रहा। आसपास के गांवों के लोग भी इस दुकान की ओर आकर्षित हो रहे हैं, क्योंकि यहां न केवल रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुएं मिलती हैं, बल्कि स्वस्थ और जागरूक जीवन जीने का संदेश भी मिलता है

परिवार का संदेश: समाज पहले, मुनाफा बाद में

विजेंदर कुमार का परिवार स्पष्ट करता है कि व्यापार में मुनाफा कमाना जरूरी है, लेकिन समाज को नुकसान पहुंचाना कतई स्वीकार्य नहीं। उनका मानना है कि अगर हर दुकानदार और व्यापारी इसी तरह समाज को सोचते हुए व्यवसाय करे, तो न केवल युवा बल्कि पूरा गांव नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित होगा।

यह दुकान अब समाज में नशामुक्त जीवन का प्रतीक बन गई है। नशे के खिलाफ यह छोटी सी पहल पूरे क्षेत्र में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में मदद कर रही है।

ग्रामीणों की सराहना और प्रतिक्रिया

गांव के लोग बताते हैं कि विजेंदर कुमार और उनके परिवार की यह पहल समाज को नई दिशा देने वाली है। लोग खासकर युवाओं को समझाते हैं कि नशे से होने वाले नुकसान कितने गंभीर हैं। कुछ ग्रामीणों ने कहा, “ऐसे लोग ही समाज में बदलाव लाते हैं। विजेंदर जी ने दिखा दिया कि व्यवसाय और नैतिक जिम्मेदारी साथ-साथ निभाई जा सकती है।”

समाज को नशामुक्त जीवन

धमदाहा प्रखंड के दुर्गापुर गांव का यह जनरल स्टोर केवल एक दुकान नहीं है। यह समाज को नशामुक्त जीवन की ओर प्रेरित करने वाला केंद्र बन गया है। विजेंदर कुमार और उनके परिवार ने यह साबित कर दिया कि व्यापार और नैतिकता साथ-साथ चल सकते हैं

आज जब अधिकतर दुकानदार सिर्फ मुनाफे के लिए नशीले उत्पाद बेचने में लगे हैं, तब विजेंदर कुमार जैसे लोग समाज में जागरूकता, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच का संदेश दे रहे हैं। उनकी यह पहल छोटे पैमाने पर ही सही, लेकिन पूरे इलाके में लोगों को नशे से दूर रहने और स्वस्थ जीवन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

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