इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने नोएडा श्रमिक आंदोलन प्रकरण में गिरफ्तार सत्यम वर्मा की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।
कोर्ट ने मामले को मुख्य न्यायमूर्ति से उपयुक्त पीठ नामित कराने के बाद 22 मई को नई वाद सूची में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। बुधवार को सुनवाई शुरू होने पर सत्यम की ओर से गिरफ्तारी की वैधता, अवैध निरुद्धि और निरंतर हिरासत को चुनौती देते हुए याचिका के गुण-दोष पर सुनवाई का आग्रह किया।
सत्यम की ओर से उनकी पत्नी शखंबरी ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर पति की गिरफ्तारी, निरुद्धि, रिमांड और आगे की हिरासत को चुनौती दी है। लखनऊ में 17 अप्रैल को सत्यम की गिरफ्तारी की गई थी।
राज्य सरकार ने सात मई को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल होने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की है। एडवोकेट शाश्वत आनंद ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 मई को सत्यम की पत्नी की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें एनएसए के तहत की गई अतिरिक्त निरुद्धि को चुनौती दी गई है।
लखनऊ निवासी सत्यम को 13 अप्रैल को नोएडा के फेज-2 औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, आगजनी और झड़प के बाद दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर गिरफ्तार किया गया है।
हाई कोर्ट में लंबित बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में गिरफ्तारी और हिरासत प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत अनियमितताओं का आरोप है। इसमें रिहाई के साथ हिरासत से संबंधित इलेक्ट्रानिक व दस्तावेजी साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।


