प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ईंधन की बचत अपील पर जनप्रतिनिधियों ने अमल कर संदेश दिया, तो आमजन भी आगे आए हैं। सरकारी विभागों में भी वाहनों के परिचालन को योजनाबद्ध और आवश्यक बनाने पर काम किया। यही वजह है कि सात दिनों में बाराबंकी में पेट्रोलियम पदार्थों की खपत में कमी आई है।
पेट्रोलियम कंपनियों से मिले आंकड़ों को जिला पूर्ति कार्यालय ने पुष्टि की। सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 5.02 से साढ़े पांच लाख लीटर डीजल और 3.70 से चार लाख लीटर पेट्रोल की खपत होती थी, लेकिन 10 मई के बाद गिरावट आई। प्रतिदिन औसतन 67 हजार लीटर कम बिक रहा है। सात दिनों में 4.73 लाख लीटर ईंधन की खपत में कमी आई है।
जिले में 247 पेट्रोल पंप संचालित हैं। 10 मई से लेकर 17 मई तक 32 लाख 24 हजार लीटर डीजल और 24.07 लाख लीटर पेट्रोल की बिक्री हुई है, जबकि सामान्य तौर पर यही बिक्री 35.14 लाख डीजल और 25.9 लाख लीटर औसतन पेट्रोल की रहती थी। माना जा रहा है कि अपील के बाद सात दिनों में 2.9 लाख डीजल और 1.83 लाख लीटर पेट्रोल की खपत कम हुई है।
बड़ेल निवासी हर्ष कश्यप, मनोज वर्मा, बंकी के वेद प्रकाश, राहुल वर्मा और रवि सिंह ने बताया कि केवल जरूरी काम से ही बाइक और कार का प्रयोग कर रहे हैं। आसपास साइकिल का प्रयोग करते।
अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी घटाया खर्च : जिले में 97 विभागों के कार्यालयों में करीब 300 अधिकारी और 32 हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। प्रति वाहन 35 से 45 हजार रुपये डीजल पर प्रति महीने खर्च आता है। पंचायत राज, ग्राम विकास, पशुपालन, पुलिस, दिव्यांग कल्याण, सिंचाई, बाढ़ खंड विभागों ने वाहनों के उपयोग में कमी की है।
पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम
शहर के पेट्रोल पंपों पर पिछले तीन दिनों की आपेक्षा कम भीड़ दिखी। लोगों ने टंकी फुल कराने के बजाय आवश्यकता अनुसार ही ईंधन भरवाना शुरू किया है। रविवार को पंपों पर दो-तीन ही वाहन ईंधन भरते दिखे।
ऐसे समझिए आंकड़ा
| दिनांक | डीजल (लाख लीटर में) | पेट्रोल (लाख लीटर में) |
| 10 मई | 4.64 | 3.35 |
| 11 मई | 3.90 | 2.80 |
| 12 मई | 3.40 | 2.70 |
| 13 मई | 4.13 | 3.33 |
| 14 मई | 3.98 | 3.22 |
| 15 मई | 4.32 | 2.75 |
| 16 मई | 5.03 | 3.14 |
| 17 मई | 3.34 | 2.78 |
| कुल | 32.24 | 24.07 |
जिले में 21.75 लाख लीटर डीजल का स्टाक उपलब्ध है, जबकि वर्तमान में 17.07 लाख लीटर ईंधन सुरक्षित है। किसी प्रकार की कमी नहीं है। पेट्रोल पंपों पर भीड़ कम हुई है और लोग जरूरत के हिसाब से ही ईंधन खर्च कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की अपील का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।


