जरा सोचिए कोई भाषा सिर्फ इसलिए गायब हो जाए, क्योंकि उसे बोलने वाला आखिरी व्यक्ति अब नहीं रहा। सुनने में यह किसी कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन आज यह हमारी दुनिया की सच्चाई बन गया है। आंकड़े बताते हैं कि इस समय दुनिया की करीब 44% भाषाएं लुप्त होने की कगार पर हैं।
जब कोई भाषा गायब होती है, तो सिर्फ कुछ शब्द या मुहावरे खत्म नहीं होते, बल्कि उनके साथ जीने का एक पूरा सलीका और सदियों का ज्ञान भी हमेशा के लिए मिट जाता है। अतीत पर नजर डालें तो 1800 के दशक में ब्लैक सी के इलाकों में एक खास भाषा को बोलने वाले हजारों लोग थे, लेकिन युद्ध, आक्रमण और विस्थापन के कारण वह पूरा समुदाय बिखर गया। आखिरकार, साल 1992 में इस भाषा को बोलने वाले अंतिम व्यक्ति की सांसें थमने के साथ ही यह भाषा भी हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दफन हो गई।
यह कोई अकेली घटना नहीं है। सन् 1950 से लेकर अब तक दुनिया भर में ऐसी 244 भाषाएं पूरी तरह से विलुप्त हो चुकी हैं। भाषा विज्ञान के जानकारों के मुताबिक, इस समय पूरी दुनिया में लगभग सात हजार भाषाएं बोली जाती हैं, जिनमें से 44% पूरी तरह खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।


