हार के बाद बिखराव की राह पर टीएमसी, कई विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खोला मोर्चा

ममता सरकार के 15 वर्षों के शासन के अंत के बाद तृणमूल कांग्रेस में बगावत के स्वर दिन-ब-दिन तेज होते जा रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता व पार्षदों के बाद अब कई विधायकों ने बागी तेवर अपना लिए हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तृणमूल के कुछ विधायकों ने कोलकाता में आपस में बैठक कर तय किया है कि वे अब पार्टी नेतृत्व की ओर से जारी किए जाने वाले प्रत्येक निर्देश का अक्षरश: पालन नहीं करेंगे बल्कि अपने-अपने विधानसभा क्षेत्र की परिस्थितियों के मुताबिक काम करेंगे।

बताया जा रहा है कि इनमें पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक भी शामिल हैं, जो हार के बाद तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी द्वारा अपने निवास स्थल पर पार्टी विधायकों के साथ की गई बैठक में शामिल नहीं हुए थे।

इस बीच ममता ने आगामी शुक्रवार को सभी जिलों के पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई है। उसमें उन्होंने वहां से निर्वाचित कई विधायकों को आमंत्रित नहीं किया है।

मालूम हो कि तृणमूल की हार के बाद पार्टी प्रवक्ता ऋजु दत्ता ने आरोप लगाया था कि पंचायत से लेकर नगर निकायों तक के तृणमूल नेताओं ने आम लोगों से जमकर वसूली की।

घर का नक्शा पास कराने से लेकर कमोड लगाने तक के लिए पैसे देने पड़ते थे। ऋजु दत्ता को ऐसी बयानबाजी के लिए पार्टी से निलंबित किया जा चुका है।

वहीं, अभिनेत्री व तृणमूल पार्षद अनन्या बनर्जी ने कहा था कि जनता परिवर्तन चाहती थी इसलिए पार्टी का ऐसा हश्र हुआ।

उससे पहले पार्षद सुब्रत बंद्योपाध्याय ने पार्टी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह चुनाव के नतीजे आने के बाद डरकर भागे पार्टी कार्यकर्ताओं को वापस लाने का प्रयास करने के बजाय घर पर बैठे हुए हैं।

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