लगातार दर्द और थकान को न करें नजरअंदाज, फाइब्रोमायल्जिया के हो सकते हैं लक्षण

विश्व फाइब्रोमायल्जिया जागरूकता दिवस के अवसर पर मंगलवार को मनस्वी हॉस्पिटल के न्यूरोसाइकियाट्री एवं डी-एडिक्शन सेंटर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को फाइब्रोमायल्जिया जैसी जटिल एवं लंबे समय तक रहने वाली बीमारी के प्रति जागरूक करना तथा इसके समय पर उपचार के प्रति सचेत करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए न्यूरो साइकियाट्रिस्ट डॉ. पंकज कुमार मनस्वी ने कहा कि आज की तेज और तनावपूर्ण जीवनशैली में बड़ी संख्या में लोग लंबे समय तक शरीर में दर्द, थकान, नींद की कमी और मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कई लोग इन समस्याओं को सामान्य कमजोरी, बढ़ती उम्र या केवल मानसिक तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई मामलों में यह फाइब्रोमायल्जिया बीमारी का संकेत हो सकता है।

उन्होंने बताया कि फाइब्रोमायल्जिया एक दीर्घकालिक दर्द संबंधी बीमारी है, जिसमें मरीज को शरीर के विभिन्न हिस्सों में लगातार दर्द, जकड़न, अत्यधिक थकान, कमजोरी, नींद की समस्या और मानसिक बेचैनी महसूस होती है। यह केवल मानसिक बीमारी नहीं है, बल्कि शरीर और मस्तिष्क के दर्द महसूस करने वाले तंत्र से जुड़ी जटिल स्थिति है।

उन्होंने कहा कि यह बीमारी महिलाओं में अधिक पाई जाती है, लेकिन पुरुष और युवा भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। समय पर पहचान और उचित उपचार से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

मनोवैज्ञानिक डॉ. आशुतोष रंजन ने कहा कि लगातार तनाव, चिंता, अवसाद, नींद की कमी और भावनात्मक दबाव फाइब्रोमायल्जिया की समस्या को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता, काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच इस बीमारी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

वहीं, फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. एम. अनवर ने बताया कि नियमित हल्का व्यायाम, स्ट्रेचिंग, योग और फिजियोथेरेपी से मरीजों को काफी राहत मिल सकती है। उन्होंने लोगों को निष्क्रिय जीवनशैली से बचने और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी।

उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे मरीजों को “कमजोर” या “बहाना बनाने वाला” कहकर नजरअंदाज न करें, बल्कि उनके प्रति संवेदनशीलता और सहयोग का भाव रखें।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने फाइब्रोमायल्जिया के प्रमुख लक्षणों में पूरे शरीर में लगातार दर्द, अत्यधिक थकान, नींद के बाद भी ताजगी महसूस नहीं होना, सिरदर्द, तनाव, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और मानसिक बेचैनी को शामिल बताया।

वहीं इसके संभावित कारणों में लगातार मानसिक तनाव, नींद की कमी, शारीरिक या भावनात्मक आघात, संक्रमण, असंतुलित जीवनशैली और चिंता-अवसाद जैसी समस्याओं को प्रमुख माना गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि इस बीमारी के प्रबंधन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श, नियमित व्यायाम, योग, फिजियोथेरेपी, तनाव प्रबंधन, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और आवश्यकता अनुसार दवाइयों का सेवन जरूरी है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को फाइब्रोमायल्जिया के प्रति जागरूक किया गया तथा समय पर पहचान और सही उपचार अपनाने की सलाह दी गई। इस अवसर पर रोगी, उनके स्वजन और स्वास्थ्य कर्मी राकेश, दीपक, राहुल, सौरभ सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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