पंजाब पुलिस के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर ने अपने खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए केंद्र और जांच एजेंसियों के अधिकार क्षेत्र पर संवैधानिक प्रश्न उठाया है।
भुल्लर ने दायर याचिका में कहा है कि पंजाब सरकार द्वारा 6 नवंबर 2020 को दिल्ली स्पेशल पुलिस एस्टैब्लिशमेंट (डीएसपीई) को दी गई सामान्य सहमति वापस लेने के बाद सीबीआई को पंजाब से जुड़े मामलों में स्वत: जांच का अधिकार नहीं रह गया था। ऐसे में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर, गिरफ्तारी, रिमांड और आगे की पूरी कार्रवाई कानूनन शून्य है।
याचिका के अनुसार भुल्लर 1993 बैच के पंजाब पुलिस अधिकारी रहे हैं और 2015 में आईपीएस पदोन्नति प्राप्त की। उन्होंने अदालत को बताया कि अक्टूबर 2023 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ पहले ही एक मामला दर्ज किया था।
सीबीआई ने दर्ज की थी अलग एफआईआर
इसके बावजूद अक्टूबर 2025 में सीबीआई ने कथित रिश्वत शिकायत के आधार पर चंडीगढ़ में अलग एफआईआर दर्ज कर ली, जबकि आरोपित घटनाएं पंजाब क्षेत्र और पंजाब पुलिस से संबंधित थीं। भुल्लर का कहना है कि समान तथ्यों पर दूसरी एफआईआर दर्ज करना सुप्रीम कोर्ट के स्थापित सिद्धांतों का उल्लंघन है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि पहले ट्रैप केस और फिर आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने पंजाब विजिलेंस की कार्रवाई के समानांतर जांच शुरू कर संघीय ढांचे का अतिक्रमण किया।
भुल्लर ने अदालत से कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलिस और लोक व्यवस्था राज्य सूची के विषय हैं, इसलिए बिना राज्य की वैध सहमति सीबीआई की कार्रवाई संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार है। उन्होंने इसे अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता और ‘प्रोसीजर एस्टैब्लिश्ड बाय लॉ’ के उल्लंघन के रूप में भी प्रस्तुत किया है।
पूर्व डीआईजी ने अपनी गिरफ्तारी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी के समय उन्हें संवैधानिक सुरक्षा और वैधानिक प्रावधानों का पूरा पालन नहीं मिला। साथ ही, उन्होंने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ दर्ज मामलों में जांच एजेंसियों द्वारा क्षेत्राधिकार, स्वीकृति और प्रक्रिया संबंधी गंभीर कानूनी कमियां हैं। हाई कोर्ट से भुल्लर ने एफआईआर रद्द करने, जांच पर रोक और अंतरिम राहत की मांग की है।


