पंजाब निकाय चुनावों का रास्ता साफ, बठिंडा की वार्डों में मतदान की तैयारी तेज; राजनीतिक हलचल शुरू

पंजाब में स्थानीय निकाय चुनावों का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। शिरोमणि अकाली दल की ओर से निकाय चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई पिटिशन रद्द होने के बाद राज्य सरकार और प्रशासन ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। बठिंडा जिले में एक नगर निगम सहित 13 नगर कौंसिलों और नगर पंचायतों में चुनाव होने हैं।

प्रशासन की ओर से अधिकारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं, जबकि मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि मई या जून महीने में कभी भी चुनाव की घोषणा हो सकती है। जिले में इस बार कुल 430 वार्डों में पार्षदों का चुनाव कराया जाएगा। इनमें बठिंडा नगर निगम के 50 वार्ड शामिल हैं।

इसके अलावा विभिन्न नगर कौंसिलों और नगर पंचायतों में भी चुनाव होंगे। वहीं तलवंडी साबो नगर कौंसिल के वार्ड नंबर 13 में उपचुनाव भी कराया जाएगा, जिसे इस चुनाव प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

कुछ इलाकों में पुरानी वार्डबंदी होगी लागू

चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार जिले की 11 स्थानीय निकाय संस्थाओं में नई वार्डबंदी के आधार पर चुनाव कराए जाएंगे। इनमें बठिंडा नगर निगम, भुच्चो मंडी, गोनियाना और मौड़ नगर कौंसिल समेत अन्य निकाय शामिल हैं। वहीं रामां मंडी, कोटफत्ता, संगत और मलूका में पुरानी वार्डबंदी के अनुसार चुनाव होंगे।

वार्डों की संख्या की बात करें तो भुच्चो मंडी और गोनियाना में 13-13 वार्ड, मौड़ मंडी में 17, रामां मंडी में 15, कोटफत्ता में 11 तथा संगत में 9 वार्डों में मतदान होगा। नगर पंचायत भगता भाईका, कोटशमीर, भाईरूपा और मेहराज में 13-13 वार्ड, जबकि नथाना, लहरा मोहब्बत, कोठागुरु और मलूका में 11-11 वार्डों में चुनाव कराए जाएंगे।

वोटर लिस्ट अपडेट करने पर जोर

प्रशासन की ओर से मतदाता सूचियों की जांच और अपडेट का कार्य तेजी से किया जा रहा है। नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और त्रुटियों को दूर करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव के लिए सही मतदाता सूची बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संबंधित विभागों को भी आवश्यक तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि चुनाव घोषणा के तुरंत बाद प्रक्रिया सुचारू रूप से लागू की जा सके।

राजनीतिक गतिविधियां हुईं तेज

दूसरी ओर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की गतिविधियां भी तेज होने लगी हैं। विभिन्न पार्टियां संभावित उम्मीदवारों की तलाश में जुट गई हैं और स्थानीय स्तर पर जनसंपर्क अभियान शुरू किए जा रहे हैं। शहरों और कस्बों में विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, सड़क, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

स्थानीय निकाय चुनावों को प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव परिणाम आने के बाद विजयी दल अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से नगर निगम, नगर कौंसिलों और नगर पंचायतों में नेतृत्व संभालेगा तथा आने वाले वर्षों के विकास कार्यों की दिशा तय करेगा।

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