भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स की चुनौती, युद्ध में शामिल सदस्यों के कारण साझा रुख पर संकट

 पश्चिम एशिया में जारी जंग पर ब्रिक्स देशों के बीच एक साझा रुख तय करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि सदस्य देशों के दृष्टिकोण अलग-अलग हैं। हालांकि भारत इस मुद्दे पर सहमति बनाने की कोशिश में जुटा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि कुछ ब्रिक्स सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिससे समूह के लिए एकमत होना कठिन हो गया है।

भारत वर्तमान में इस प्रभावशाली समूह की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें हाल ही में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात(यूएई) सहित अन्य देशों को शामिल किया गया है।

28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए थे, जिसके बाद ईरान ने यूएई और अन्य खाड़ी देशों पर जवाबी कार्रवाई की। इस संदर्भ में भारत के सामने चुनौती है कि वह ब्रिक्स का एक साझा रुख कैसे तैयार करे।

जायसवाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा- ‘ब्रिक्स के कुछ सदस्य वर्तमान में पश्चिम एशिया संघर्ष में सीधे शामिल हैं, जिससे साझा रुख तय करने में समस्या उत्पन्न हो रही है।’

उन्होंने बताया कि भारत ”शेरपा चैनल” के माध्यम से ब्रिक्स देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ा रहा है। अंतिम शेरपा बैठक 12 मार्च को डिजिटल माध्यम से आयोजित की गई थी।

उन्होंने कहा- ‘हम साझा रुख तय करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भिन्न विचारों के कारण यह कठिन हो रहा है। हम ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि इस संघर्ष पर कोई साझा रुख तय किया जा सके।’

उन्होंने यह भी बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची के बीच इस मुद्दे पर फोन पर बातचीत हुई है।

ब्रिक्स में दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल ब्रिक्स में प्रारंभ में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। 2024 में मिस्त्र, इथोपिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई को जोड़ा गया।

2025 में इंडोनेशिया भी शामिल होगा। ब्रिक्स अब एक प्रभावशाली समूह बन चुका है, जिसमें दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। यह समूह वैश्विक आबादी का लगभग 41त्‍‌न और जीडीपी का एक बड़ा हिस्सा कवर करता है।

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