देश के सबसे पुराने समुद्री यूनियनों में से एक नेशनल यूनियन ऑफ सीफेरर्स ऑफ इंडिया (एनयूएसआई) ने कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच 20 हजार से ज्यादा भारतीय नाविक फंसे हुए हैं। यूनियन को इस बात का डर है कि संघर्ष फैलने से जहाज फंस सकते हैं और चालक दल बिना भोजन और दवा के वहीं फंसे रह सकते हैं।
इस संस्था ने सरकार से आग्रह किया है कि वह इस संकट को राष्ट्रीय प्राथमिकता माने और तत्काल निकासी प्रोटोकॉल लागू करे। इस क्षेत्र में भारतीय नाविकों की स्थिति लगातार बदलती रहती है, क्योंकि जहाजों के शेड्यूल, बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों, फ्लैग स्टेट्स और सुरक्षा अलर्ट के आधार पर क्रू रोजाना बदलते रहते हैं।
कई चुनौतियों का सामना कर रहे भारतीय नाविक
खाड़ी क्षेत्र और उसके आस-पास काम करने वाले नाविकों को अब मिसाइल और ड्रोन के खतरों, काम-काज पर लगी पाबंदियों और सुरक्षा सलाहों का सामना करना पड़ रहा है। इन चीजों ने तकनीकी तौर पर खुले होर्मुज स्ट्रेट से होने वाली आम यात्राओं को बेहद जोखिम भरी यात्राओं में बदल दिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एनयूएसआई के जनरल सेक्रेटरी सह कोषाध्यक्ष मिलिंद कंदलगांवकर ने शनिवार को बताया, “नाविकों और उनके परिवारों के बीच घबराहट बढ़ती जा रही है। हमें परेशान रिश्तेदारों के लगातार फोन आ रहे हैं, जो पूछ रहे हैं कि क्या उनके परिवार के सदस्य सुरक्षित घर लौट पाएंगे।”
‘नाविकों को तुरंत मिलनी चाहिए सुरक्षा’
इन नाविकों के परिवार खबरों के अलर्ट, जहाजों की आवाजाही और संघर्ष से जुड़े अपडेट पर नजर रख रहे हैं। कंदलगांवकर के मुताबिक, कई भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले जहाजों पर काम करते हैं, जहां जिम्मेदारी जहाज मालिकों, बीमा कंपनियों, संबंधित देशों और स्थानीय अधिकारियों के बीच बंटी होती है।
सेना के जवानों के उलट, मर्चेंट नेवी के क्रू सदस्य आम नागरिक होते हैं, जो सीमित सुरक्षा के बावजूद वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। समुद्र में करीब दो दशक बिताने वाले कंदलगांवकर ने कहा, “ये नाविक बेहद मुश्किल हालात में वैश्विक व्यापार और भारत की आर्थिक सुरक्षा की सेवा करते हैं और इन्हें तुरंत सुरक्षा मिलनी चाहिए।”


