2017 के फर्जी वसीयत और धोखाधड़ी मामले में कोर्ट का अहम आदेश, क्राइम ब्रांच 10 महीने में पेश करे जांच रिपोर्ट

 वर्ष 2017 के कथित फर्जी वसीयत और धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए थाना दोमाना की ओर से पेश की गई क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया है। साथ ही मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए इसे क्राइम ब्रांच जम्मू को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

यह आदेश स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट (इलेक्ट्रिसिटी) जम्मू आरती देवी कौशल ने यूटी बनाम नीमो शीर्षक मामले में सुनाया। मामले की शिकायत राज कुमार ने दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार आरोपित अश्विनी कुमार, बंसी लाल और विजय कुमार सहित अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश रचकर दिवंगत सोमा देवी के नाम पर फर्जी वसीयत तैयार की और एक फर्जी व्यक्ति को सब-रजिस्ट्रार के समक्ष पेश कर दस्तावेज को असली दिखाकर संपत्ति हड़पने का प्रयास किया।

महत्वपूर्ण तथ्यों की स्वतंत्र जांच नहीं की

शिकायत में कहा गया कि सोमा देवी की मृत्यु वर्ष 1996 में हो चुकी थी जबकि उनके नाम पर 26 जून 2001 को वसीयत दर्ज कराई गई। आरोप है कि अश्विनी कुमार को सोमा देवी का गोद लिया पुत्र बताकर जमीन अपने नाम कराई गई और बाद में संपत्ति का हिस्सा बेचा भी गया।

पुलिस ने फरवरी 2018 में शिकायत को झूठा बताते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। हालांकि कोर्ट ने रिकार्ड और शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद पाया कि जांच में कई गंभीर खामियां हैं और जांच अधिकारी ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों की स्वतंत्र जांच नहीं की। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कथित गोद लेने से जुड़े दस्तावेज, स्कूल रिकार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड, राशन कार्ड और अन्य पहचान संबंधी रिकार्ड की ठीक से जांच नहीं की गई।

कोर्ट ने दस्तावेजों में उम्र संबंधी विरोधाभासों पर भी सवाल उठाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार कर दिया और पूरे मामले की नई जांच क्राइम ब्रांच जम्मू को सौंप दी। कोर्ट ने क्राइम ब्रांच को निर्देश दिया है कि वर्ष 2017 से लंबित इस मामले की जांच यथासंभव दस महीनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट पेश की जाए।

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