हम अब डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित करेंगे नाॅलेज कॉरिडोर, ताकि ज्ञान बांटा व सीखा जा सके : राजनाथ सिंह

 शहर के कैंट स्थित कोबरा आडिटोरियम ने नार्थ टेक सिम्पोजियम 2026 का रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हम अब डिफेंस कॉरिडोर के रूप में नाॅलेज कॉरिडोर विकसित करेंगे, ताकि जो ज्ञान है उसे भी बांटा जा सके, एक-दूसरे से सीखा जा सके। जिस तरह से प्रयागराज में नदियों का संगम होता है वैसे ही नार्थ टेक सिम्पोजियम में ‘रक्षा त्रिवेणी संगम’ हुआ है। यहां वैज्ञानिकों, सैन्य रणनीतिकारों और उद्योग जगत का संगम हुआ है।

‘किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना पड़ेगा’

उन्होंने ईरान-अमेरिका युद्ध और यूक्रेन रूस युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि हमें अभी से ही किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना पड़ेगा, क्योंकि जिस तरह से दुनिया में युद्ध चल रहा है और तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है ऐसे में हम तकनीक के मामले में पीछे नहीं रह सकते। युद्ध तो सैनिकों से ही जीता जाता है लेकिन अपने सैनिकों को हमें तकनीक से लैस करना होगा।

बोले- यहां ज्ञान और शक्ति का महाकुंभ देख रहा

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज मैं यहां ज्ञान और शक्ति का महाकुंभ देख रहा हूं और रक्षा त्रिवेणी संगम की थीम अपने शब्दों को चरितार्थ कर रही है। यह बदलाव का दौर है और इतिहास गवाह है जब नई क्रांति आती है तो बदलाव ले आती है अगर हम इस बदलाव के साथ नहीं रहे तो पीछे रह जाएंगे क्योंकि क्रांति उलट फेर करती है। संतुलन बिगड़ा है और अगर हमें शांति स्थापित करनी है तो बदलाव के साथ रहना होगा।

‘मौजूदा हालात को देखते हुए तकनीक को बढ़ाना होगा’

उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद परिस्थितियों बहुत तेजी के साथ बदली थी। जिनके पास उस वक्त तकनीक थी निश्चित तौर पर वह बड़ी शक्ति बनकर उभरा है। ऐसे में मौजूदा हालात को देखते हुए हमें भी तकनीक को बढ़ाना होगा। आज कौन सी चीज कब हथियार बन जाए किसी को नहीं पता। ऐसे में हमें भी उसी स्तर की सोच रखनी होगी।

सेना को अपटूडेट अपटूमार्क व अप टूस्टैंडर्ड रखना होगा

सेना की बदलती परिस्थितियों के अनुसार बदलना होगा। सेना को अप टू डेट अप टू मार्क और अप टू स्टैंडर्ड रखना होगा। ऑपरेशन सिंदूर में हमने साबित किया है कि हमारा शौर्य क्या है हमारी शक्ति क्या है लेकिन हमें सरप्राइज करने वाली शक्तियों को जुटाना होगा। क्योंकि अब युद्ध वही जीतेगा जिसके पास कुछ सरप्राइज करने वाली शक्तियां हो। जो देश तकनीक को अडॉप्ट करेगा वही शक्तिशाली बनेगा हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और इसमें बड़ी सफलता इसलिए मिल रही है, क्योंकि अब प्राइवेट सेक्टर भी हमारे साथ है। मैं उत्तर प्रदेश का उदाहरण दे सकता हूं यहां डिफेंस कॉरिडोर बन रहा है, ब्रह्मोस की असेंबली हो रही है। यह सब उसी का हिस्सा है।

‘ग्लोबल शक्ति के रूप में हम आगे बढ़ेंगे’

आज गंगा एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो चुका है और उसका इस्तेमाल सेना भी कर सकेगी। मैं यही संदेश देना चाहूंगा कि रिसर्च करिए भविष्य का युद्ध कैसे होगा यह हम नहीं लाई बताएगी टेक्नोलॉजी बताएगी। आज का यह कार्यक्रम मील का पत्थर साबित होगा और ग्लोबल शक्ति के रूप में हम आगे बढ़ेंगे।

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