ऐसे में ये समझा जा रहा है कि अगर भारत को सही में स्पोर्टिंग नेशन बनना है तो उन्हें सबसे पहले सोच को बदलना होगा। एक शूटर को वही सम्मान मिलना चाहिए जो कि एक क्रिकेटर को मिलता है। एक शूटिंग विश्व कप की चर्चा उतनी होनी चाहिए, जितनी आईपीएल के मैच की होती है।