सौर ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन बनेगा पेट्रोलियम पदार्थों का विकल्प, JP यूनिवर्सिटी में हो रहा शोध; BARC में होगा परीक्षण

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने पेट्रोलियम पदार्थों के दामों को बढ़ा दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आमजन से पेट्रोलियम पदार्थों के उपयोग को कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करने की अपील की है। वहीं, देश के वैज्ञानिकों ने भी पेट्रोलियम पदार्थों के विकल्प के रूप में ईंधन को लेकर रिसर्च शुरू कर दी है। ऐसा ही एक शोध जेपी विश्वविद्यालय अनूपशहर (JP University Anupshahr) की मैटेरियल फिजिक्स लैब में शुरू हो गया है।

लैब में सौर ऊर्जा और रासायनिक ऊर्जा के संयोजन से हाइड्रोजन उत्पादन की उन्नत तकनीक विकसित कर पेट्रोलियम पदार्थों के विकल्प के रूप में उपयोग करने को लेकर महत्वपूर्ण शोध कार्य किया जा रहा है। यह शोध तीन वर्षों में पूरा होगा। वर्तमान में शोध के प्रारंभिक चरण में विकसित नमूनों को परीक्षण के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) भेजा जा रहा है।

परियोजना में जूनियर रिसर्च फेलो लक्ष्मी शर्मा (मध्य में) के साथ दोनों सहायक शोध विद्यार्थी प्रकृति भारद्वाज और यश कौशिक। जागरण 

परमाणु ऊर्जा विभाग, भारत सरकार द्वारा सौर ऊर्जा और रासायनिक ऊर्जा के संयोजन से हाइड्रोजन उत्पादन की उन्नत तकनीक विकसित करने के उद्देश्य से इस परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस शोध की अवधि तीन वर्ष निर्धारित की गई है। देशभर से प्राप्त लगभग 1300 प्रस्तावों में से केवल जेपी विश्वविद्यालय, अनूपशहर और एनआईटी श्रीनगर (NIT Srinagar) का चयन किया गया है। परियोजना की मुख्य अन्वेषक डा. प्रियंका झा के निर्देशन में यह शोध कार्य संचालित किया जा रहा है।

डा. प्रियंका झा।

जेपी विश्वविद्यालय अनूपशहर में भौतिक विज्ञान की विभागाध्यक्ष डा. प्रियंका झा ने बताया कि सौर ऊर्जा से उत्पादित हाइड्रोजन का उपयोग भविष्य में परिवहन, ऊर्जा भंडारण तथा अन्य अनेक क्षेत्रों में किया जा सकेगा। विशेष रूप से वाहनों के संचालन में इसका उपयोग पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता को कम करने में सहायक होगा। हाइड्रोजन ईंधन के उपयोग से कोई हानिकारक अवशेष उत्पन्न नहीं होता, जबकि पारंपरिक ईंधन पर्यावरण प्रदूषण का प्रमुख कारण हैं।

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र में नमूनों की जांच के बाद परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। इस परियोजना के लिए बोर्ड आफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंस द्वारा विश्वविद्यालय को 36.16 लाख रुपये का शोध अनुदान प्रदान किया गया है। इस राशि का उपयोग अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना तथा शोध कार्य के लिए आवश्यक मानव संसाधन के विकास में किया जा रहा है। विश्वविद्यालय की मैटेरियल्स फिजिक्स लैब में सोलर सिम्युलेटर, पोटेंशियोस्टेट तथा अन्य आधुनिक शोध उपकरण स्थापित किए गए हैं।

परियोजना में जूनियर रिसर्च फेलो के रूप में डीपीबीएस कालेज से रसायन विज्ञान में एमएससी कर चुकी छात्रा लक्ष्मी शर्मा कार्यरत हैं। भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा उन्हें दो वर्षों तक फेलोशिप प्रदान की जाएगी। शोध कार्य में संतोषजनक प्रगति होने पर तीसरे वर्ष उन्हें सीनियर रिसर्च फेलोशिप प्रदान की जाएगी।

इस शोध कार्य में सहयोगी के रूप में जेपी इंस्टीट्यूट आफ इंफार्मेशन टेक्नोलाजी नोएडा से एमएससी तथा आईआईटी वाराणसी और आईआईटी हैदराबाद में इंटर्नशिप प्राप्त यश कौशिक हैं। उनके साथ बीएससी फिजिक्स की छात्रा प्रकृति भारद्वाज भी परियोजना में इंटर्नशिप कर रही हैं।

शोध के स्वच्छ एवं सतत ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि सिद्ध होने की आशा: कुलपति

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