रामनगर के बीएमओ के खिलाफ हुए कथित दुर्व्यवहार के मुद्दे पर डॉक्टर्स एसोसिएशन जम्मू के बाद अब जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लइज फेडरेशन भी आगे आई है। उन्होंने भी आरोप लगाया है कि विधायक प्रशासनिक कमियों को छिपाने के लिए डॉक्टरों को निशाना बना रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर मेडिकल इंप्लाइज फेडरेशन के प्रधान सरदार जसविंद्र सिंह की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दधमपुर जिले के कघोट में कुछ दिन पहले हुए बस हादसे में 22 लोगों की जान चली गई थी। लेकिन इसमें घायल हुए सभी लोगों को उप जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिया गया।
उन्होंने कहा कि रामनगर में हुई समीक्षा बैठक के दौरान राज्यसभा सांसद सत शर्मा, स्थानीय जनप्रतिनिधि और अन्य राजनीतिक नेताओं की उपस्थिति में बीएमओ के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। एसोसिएशन की ओर से कहा गया है कि अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने सभी घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया और किसी भी मरीज को बिना चिकित्सा सहायता के नहीं छोड़ा।
उधमपुर रेफर करना था प्रोफेशनल फैसला
एसोसिएशन के अनुसार गंभीर रूप से घायल 17 मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर विशेषज्ञ उपचार के लिए मेडिकल कालेज उधमपुर रेफर किया गया। यह लापरवाही नहीं, बल्कि विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पेशेवर निर्णय था।
एसोसिएशन ने कहा कि उप जिला अस्पताल रामनगर में न तो सर्जन है और न ही आर्थोपेडिक विशेषज्ञ तैनात हैं।सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, एक्स-रे मशीन लंबे समय से खराब है, ब्लड बैंक नहीं है।क्या वहां पर विशेषज्ञ इलाज संभव था। एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों और सड़क हादसे के वास्तविक कारणों पर ध्यान देने के बजाय राजनीतिक नेतृत्व ने चिकित्सा कर्मियों को निशाना बनाया।
इससे डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों में गहरा मानसिक तनाव और निराशा पैदा हुई है। उन्होंने रामनगर के विधायक से बीएमओ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का सम्मान बढ़ाने के लिए कहा ताकि उनका मनोबल बढ़े और वे बेहतर काम करें।गौरतलब है कि एक दिन पहले डाक्टर्स एसोसिएशन जम्मू ने भी बीएमओ के साथ हुए व्यवहार को लेकर कड़ी आपत्ति जताई थी।


