ठाकुरगंज अंचल की तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) सुचिता कुमारी को दाखिल-खारिज मामले में अनियमितता बरतने के आरोप में विभागीय दंड दिया गया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए संचयी प्रभाव के बिना दो वेतन वृद्धि पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
सुचिता कुमारी वर्तमान में औरंगाबाद के भू-अर्जन कार्यालय में राजस्व अधिकारी सह कानूनगो के पद पर कार्यरत हैं। उनके खिलाफ शिकायत थी कि उन्होंने फर्जी केवाला के आधार पर जमीन का गलत दाखिल-खारिज कर दिया।
शिकायतकर्ता द्वारा आपत्ति दर्ज कराने और आवश्यक साक्ष्य प्रस्तुत करने के बावजूद मामले में उचित कार्रवाई नहीं की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी किशनगंज के जिलाधिकारी को सौंपी गई थी। 29 अप्रैल 2025 को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजी।
रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को सही पाया गया। इसके बाद विभाग ने आरोप पत्र, जांच रिपोर्ट और समाहर्ता के मंतव्य की समीक्षा की। समीक्षा के उपरांत सुचिता कुमारी पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत विभागीय दंड लगाया गया।
यह पूरा विवाद ठाकुरगंज प्रखंड की भातगांव पंचायत स्थित मौजा भातगांव, तौजी संख्या- 322, थाना संख्या- 01 की जमीन से संबंधित है।
पीड़ित मु. कसमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि उनके सौतेले भाई मु जमील अख्तर ने फर्जी निबंधित केवाला तैयार कर अंचल कार्यालय को गुमराह किया और जमीन का अवैध दाखिल-खारिज करा लिया।
कसमुद्दीन ने 29 नवंबर 2024 को दाखिल-खारिज रद करने के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन भी दिया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
मंत्री स्तर तक पहुंचा मामला
इस संबंध में स्थानीय विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल ने कहा कि उक्त विभागीय कार्रवाई से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
राजस्व विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जमीन से जुड़े मामलों में लापरवाही, फर्जीवाड़ा या नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
यह मामला तत्कालीन राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री संजय सरावगी तक पहुंचा। जिसके बाद उनके निर्देश पर उच्चस्तरीय जांच कराई गई। जांच में तत्कालीन सीओ सुचिता कुमारी को दोषी पाया गया। उक्त विभागीय प्रक्रिया के दौरान उन्हें पहले निलंबित भी किया गया था। अब जांच और अनुशासनिक कार्रवाई पूरी होने के बाद विभाग ने अंतिम दंडादेश जारी कर दिया है।


