जिले में गेहूं की सरकारी खरीद में नमी और कचरे की सफाई के नाम पर प्रति क्विंटल आधा किलोग्राम की अवैध रूप से कटौती कर लाखों रुपये की चपत लगाने का मामला सामने आया है। भले ही दिखने में आधा किलोग्राम की कटौती मामूली सी दिखाई दे मगर इससे खरीद एजेंसियों और कुछ आढ़तियों ने मिलकर लाखों रुपये के व्यारे-न्यारे कर लिए। मामले की भनक सरकार को लग गई है। मुख्यमंत्री दरबार तक सूचना पहुंच गई और इसके बाद यह अवैध वसूली बंद कर दी गई है।
किसानों के सामने रखे दो विकल्प
सूत्र बताते हैं कि गेहूं की खरीद के शुरुआती दिनों में नमी की शिकायतें आ रही थीं। इसको लेकर कुछ लोगों ने नया रास्ता निकाल लिया। किसानों के सामने दो विकल्प रखे गए। पहला या तो किसान प्रति क्विंटल आधा किलो कटौती करवा ले और दिनभर की परेशानी न झेले। दूसरा विकल्प दिनभर गेहूं की सफाई करवाने का इंतजार करे और बोली लगने के बाद ही जाए। ऐसे में किसान के सामने पहले वाला विकल्प ज्यादा बेहतर दिखाई देता।
किसानों का 15 लाख रुपया हड़पा
नियमानुसार पहला विकल्प अपनाया ही नहीं जा सकता था। किसान को मात्र आधा किलोग्राम के हिसाब से प्रति क्विंटल करीब 13 रुपये का ही नुकसान दिख रहा था, लेकिन इसकी गणना करने पर बड़े घोटाले का पता चला। जिले में एक लाख 16 हजार क्विंटल यानि ( 16015 एमटी) गेहूं की अब तक खरीद हो चुकी है। इसकी गणना के अनुसार करीब 15 लाख रुपये की चपत किसानों को लग चुकी है।
उगाही की रकम का 7:4:2 के अनुपात में बंटवारा
सूत्रों ने बताया कि इस राशि के बंटवारे के लिए 7:4:2 का फार्मूला बनाया गया। इसके तहत सात रुपये संबंधित आढ़ती, चार रुपये खरीद एजेंसी के अधिकारी और दो रुपये गोदाम इंचार्ज को कुल 13 रुपये का बंटवारा कर दिए गए।
सही से जांच होने पर खुलेगी पोल-पट्टी
इस बीच इस मामले की भनक पैनी नजर रखने वाले विभाग के अधिकारियों को लग गई और सूचना मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंच गई। पता चला है कि इसकी जानकारी अवैध कटौती करने वालों को भी मिल गई और अब उन्होंने इस कटौती को बंद कर दिया है। देखने वाली बात यह होगी कि क्या इस मामले की जांच ईमानदारी से होगी। यदि जांच सही से हुई तो बड़ा गोलमाल सामने आ सकता है।
प्रदेश गेहूं बिजाई और उपज का हाल
दरअसल, प्रदेश के 24.89 लाख हेक्टेयर में इस बार गेहूं की बिजाई की गई। 123.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गय। 72 लाख मीट्रिक टन गेहूं केंद्र सरकार द्वारा खरीदा जाना है। प्रदेश में एक अप्रैल से गेहूं की खरीद 2585 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से शुरू की गई थी। महेंद्रगढ़ जिले के कनीना और सतनाली में सर्वाधिक गेहूं की खरीद चल रही है। अटेली में ज्यादा गेहूं नहीं आया।
मंडी वाइज गेहूं की खरीद का आंकड़ा
| क्षेत्र | खरीद (मिट्रिक टन में) |
| नारनौल | 0 |
| अटेली मंडी | 958 |
| नांगल चौधरी | 0 |
| महेंद्रगढ़ | 86 |
| कनीना | 7474.60 |
| सतनाली | 7496.52 |
| कुल खरीद | 16015.12 |


