हरियाणा: रिटायर होने के बाद अब ‘सर्प रक्षक’ बने कर्नल राठी, झज्जर में सांपों को बचाने के लिए छेड़ा अनोखा अभियान

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 पर्यावरण संरक्षण की असली तस्वीर तब उभरती है, जब कोई व्यक्ति व्यक्तिगत संकल्प को सामाजिक अभियान में बदल देता है। पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल यशपाल सिंह राठी ने सर्प संरक्षण को जनजागरण से जोड़ते हुए पर्यावरण संतुलन की ऐसी कड़ी को मजबूत किया है, जिस पर कृषि, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य टिका है।

मोटरसाइकिल से गांव-गांव पहुंचकर वह लोगों को यह समझा रहे हैं कि जिन जीवों को अक्सर भय या अंधविश्वास के कारण मार दिया जाता है, वही प्रकृति के प्राकृतिक प्रहरी हैं। स्कूलों, कालेजों और युवाओं के बीच कार्यशालाओं के माध्यम से वह सह-अस्तित्व और वैज्ञानिक सोच का संदेश दे रहे हैं।

उनका प्रयास यह साबित कर रहा है कि यदि समाज भय की जगह समझ को अपनाए तो प्रकृति की प्रत्येक कड़ी मजबूत हो सकती है। सर्प संरक्षण के इस अभियान ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण संतुलन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिक पहल से भी सुदृढ़ होता है।

कभी सरहदों की सुरक्षा का दायित्व संभालने वाले भारतीय सेना के कर्नल यशपाल सिंह राठी अब पर्यावरण संरक्षण को जनमिशन बना चुके हैं। उनकी पहल का सबसे बड़ा प्रभाव कृषि क्षेत्र में दिखाई देता है।

गांव-गांव पहुंचकर वह अपने अभियान के दौरान लोगों को संदेश देते हैं कि जब खेतों में प्राकृतिक रूप से कीट नियंत्रण होता है तो रासायनिक जहर का प्रयोग घटता है। इससे मिट्टी की सेहत सुधरती है, जैव विविधता सुरक्षित रहती है और खाद्य गुणवत्ता बेहतर होती है।

इस प्रकार सर्प संरक्षण सीधे टिकाऊ खेती और खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करता है। वह बताते हैं कि सांप, मेंढक और अन्य जीव केवल वन्यजीव नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और मानव सुरक्षा के प्राकृतिक प्रहरी हैं। उनका कार्य इको-सिस्टम की उन कड़ियों को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिन पर कृषि, जल स्रोत और मानव स्वास्थ्य निर्भर करते हैं।

उनके अनुसार मेंढक और छिपकलियां पर्यावरण के थर्मामीटर हैं, जिनकी घटती संख्या प्रदूषण का संकेत देती है। ये जीव मच्छरों और हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों की रोकथाम में सहायक होते हैं।

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