कानपुर में बंदी की कगार पर साबुन-डिटर्जेंट इंडस्ट्री, ईरान-इजराइल युद्ध का बड़ा असर

ईरान और इजरायल-अमेरिका युद्ध ने शहर के 500 से ज्यादा डिटर्जेंट व साबुन निर्माताओं को संकट में डाल दिया है।

डिटर्जेंट व साबुन बनाने में काम आने वाले लिनियर एल्काइल बेंजीन सल्फोनिक एसिड (एलबीएसए- एसिड स्लरी) का बाजार भाव बढ़ने और आपूर्ति संकट उत्पन्न होने से उत्पादन लगभग ठप होने के कगार पर है।

रसायनों की आपूर्ति करने वाली पेट्रोलियम कंपनियां अनुबंध बिक्री के तहत बड़े डिटर्जेंट निर्माताओं को ही इसकी आपूर्ति कर रही हैं, जबकि एमएसएमई सेक्टर इससे वंचित है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने की वजह से केमिकल बाजार में एलबीएसए की जबरदस्त किल्लत हो गई है। देश की बड़ी डिटर्जेंट व सोप निर्माता कंपनियों को ही इसकी आपूर्ति मिल पा रही है। फरवरी में 125 रुपये प्रति किलो मिलने वाला कच्चा माल मार्च अंत तक 270 रुपये प्रति किलो हो गया था।

ईरान-अमेरिका सीज फायर के बाद दाम में थोड़ी कमी आई है लेकिन अब भी यह 220 रुपये प्रति किलो के भाव पर है। इससे शहर के एमएसएमई की उत्पादन लागत दोगुणा तक महंगी हो गई है। दूसरी ओर पुरानी दर पर कच्चा माल मिलने की वजह से देश के बड़े डिटर्जेंट निर्माता अब भी उसी रेट पर माल बेच रहे हैं।

एमएसएमई की समस्या समाधान के लिए निदेशक उद्योग ने इंडियन आयल के चेयरमैन और एमएसएमई मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि प्रदेश की एमएसएमई को भी कच्चा माल उपलब्ध कराया जाए और इसके लिए कोटा निर्धारित करने पर विचार किया जाए।

संविदा बिक्री से विकराल हुआ संकट

डिटर्जेंट उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार एसिड स्लरी के निर्माता स्टाक रोककर बाजार में कृत्रिम संकट पैदा कर रहे हैं। क्रूड आयल के शोधन के दौरान ही यह रसायन प्राप्त होते हैं, जिन्हें तेल शोधन कंपनियां सीधे देश के बड़े डिटर्जेंट निर्माताओं को बेच रही हैं।

रसायनों को मिलाकर एसिड स्लरी बनाने वाली शहर में तीन से चार फैक्ट्रियां हैं लेकिन उन्हें भी कच्चा माल नहीं मिल रहा है। सीधे तैयार एसिड स्लरी लेने वाली एमएसएमई तो पिछले महीने भर से उत्पादन ही नहीं कर पा रही हैं।

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