वन विभाग ने सदर, कादीपुर, जयसिंहपुर, लम्भुआ रेंज में स्थापित 51 शक्तिवनों में नष्ट हुए चार हजार पौधों के स्थान पर नए पौध रोपने की कार्ययोजना तैयार की है। देखरेख के अभाव में यह पौधे सूख गए। विभाग सूखे पौधों के स्थान पर महुआ और लसोड़ा का पौध रोपेगा। आगामी पौधारोपण महाभियान में नष्ट हुए पौधों की जगह नए पौधे रोपने की तैयारी विभाग ने पूरी कर ली है। इससे पर्यावरण संंरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
इस स्थानों पर स्थापित किए गए हैं शक्तिवन
सदर में वलीपुर, टिकरिया, पकड़ी, गोड़वा,सैफुल्लागंज, सेउर, चमुरखा, शवनगर, एकलखी, धनजई, बिसावां, देहली, बिरधौरा, बीही, दरियापुर, गोविन्दपुर, हेमनापुर, लम्भुआ के शेरपुर, परशुरामपुर, केनौरा, असरवन, गरएं, तातोमुरैनी, उमरपुर, कादीपुर के धर्मदासपुर, कैथी, जलालपुर, लोरपुर, बरामदपुर, नगरी, बनगवांडीह, फरीदपुर, कटसारी, धनपुर, राईबीगो, मगरसनकला, गौरा, टिकरी, जयसिंहपुर के जासापारा, गूरेगांव, बरूई, इमिलियाखुर्द, पारा, कारेबन, पीढ़ी, गोसैसिंहपुर, मुरैनी, करमदासपुर, लमकना, दूबेपुर, सलीमपुर, देवलपुर, हमजाबाद, डड़वाकला और काछा भिटौरा में शक्तिवनों की स्थापना की गई है।
आधा और एक हेक्टेयर भूमि में स्थापित किए गए हैं वन
आधा हेक्टेयर भूमि में आठ सौ और एक हेक्टेयर भूमि में 16 सौ पौधे रोपे गए हैं। ये वन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार साबित हो रहे हैं। वन विभाग की इस पहल से वातावरण स्वच्छ रहने के साथ ही आक्सीजन के स्तर में भी सुधार होगा। इन वनों में पौधों की सुरक्षा के लिए तारफेंसिंग कराई गई है। पूर्व सांसद मेनका गांधी की पहल पर वन विभाग ने शक्तिवनों की स्थापना कराई थी।
शक्तिवनों को कराया जाएगा विकसित
प्रभागीय वनाधिकारी अमित सिंह ने बताया कि शक्तिवनों में नष्ट हुए करीब चार पौधों के स्थान पर महुआ और लसोड़ा के पौध रोपे जाएंगे। सूखे पौधों के सथल पर सभी रेंजरों को गढ्ढे की खोदाई के निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष में इन वनों को विकसित कराने की पहल की जाएगी।


