वर्ष 2015 बैच के आईएएस नवनियुक्त जिलाधिकारी आलोक यादव ने तहसील शामली पहुंचकर विधिवत रूप से कार्यभार ग्रहण कर लिया।
इंजीनियरिंग से सिविल सेवा तक का सफर
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा जनपद के निवासी आलोक यादव शिक्षा से एक इंजीनियर हैं। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग के बजाय जनसेवा को चुना और कठिन परिश्रम से सिविल सेवा परीक्षा उत्तीर्ण की। शामली आने से पूर्व वह झांसी विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के पद पर तैनात थे, जहां उन्होंने शहरी विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनसुनवाई को प्रभावी बनाना और शासन की योजनाओं को पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।
पश्चिम यूपी का अनुभव बनेगा ताकत
डीएम आलोक यादव के पास उत्तर प्रदेश विशेषकर पश्चिम यूपी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव है। वह मुजफ्फरनगर में वर्ष 2019-20 के दौरान मुख्य विकास अधिकारी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। मुजफ्फरनगर व बिजनौर (संयुक्त मजिस्ट्रेट) जैसे पड़ोसी जिलों में रहने के कारण वे इस क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और रणनीतिक परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। प्रशासनिक गलियारों में अपनी बेदाग छवि और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले आलोक यादव से जनता को विकास की नई उम्मीदें हैं
वर्ष 2015 बैच के आईएएस अधिकारी आलोक यादव ने शुक्रवार देर शाम कोषागार के डबल लाक में महत्वपूर्ण अभिलेखों पर हस्ताक्षर कर जिले की प्रशासनिक बागडोर अपने हाथों में ली। कार्यभार ग्रहण करने के दौरान जिला प्रशासन के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। एडीएम सत्येन्द्र सिंह, एसडीएम निधि भारद्वाज, एसडीएम कैराना शिवाजी यादव, एसडीएम ऊन विनय प्रताप सिंह भदौरिया व डिप्टी कलेक्टर हामिद हुसैन वरिष्ठ कोषाधिकारी धीरज कुमार ने डीएम का स्वागत किया।
अधूरे प्रोजेक्ट्स को गति, समस्याओं का निस्तारण प्राथमिकता: डीएम
डीमए आलोक यादव ने दैनिक जागरण से वार्ता करते हुए बताया कि अधूरे पड़े विकास प्रोजेक्ट्स को समय सीमा के भीतर पूरा कराएंगे। कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखने, जनसुनवाई को प्रभावी बनाना और शासन की योजनाओं को पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है।


