प्रदेश में जनगणना कार्य शुरू होते ही शिक्षा व्यवस्था पर इसका असर पड़ने की बात कही जा रही है। बड़ी संख्या में शिक्षकों और कर्मचारियों की जनगणना ड्यूटी लगाए जाने से सरकारी विद्यालयों, खासकर जूनियर हाईस्कूल स्तर पर, पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई स्कूलों को बंद करने की स्थिति बनने का दावा किया जा रहा है। शिक्षक संघ ने भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए जनगणना में निर्देशों का पालन न करते हुए मनमाफिक ड्यूटी लगाने का आरोप लगाया है।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ देहरादून के जिला अध्यक्ष सूरज मंद्रवाल ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि विभागीय निर्देशों में स्पष्ट विरोधाभास है। एक ओर स्कूलों को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं स्कूलों के सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगा दी गई है।
उन्होंने बताया कि नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, पठन-पाठन और प्रशासनिक कार्य चरम पर होते हैं, लेकिन शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण ये सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इससे अभिभावकों और छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सूरज मंद्रवाल के अनुसार कई शिक्षकों की ड्यूटी उनके कार्यक्षेत्र से 20 से 25 किलोमीटर दूर लगाई गई है, जिससे आवागमन में भी कठिनाइयां आ रही हैं।
कुछ मामलों में शिक्षकों को एक साथ दो स्थानों नगर पालिका और तहसील में ड्यूटी दी गई है, जिससे कार्य का दबाव बढ़ रहा है और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी जिलाधिकारी से मुलाकात हो चुकी है, जहां से उन्हें एडीएम से वार्ता के निर्देश मिले हैं।
शिक्षक संघ ने प्रशासन से मांग की है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम एक शिक्षक को जनगणना ड्यूटी से मुक्त रखा जाए, ताकि शैक्षणिक कार्य सुचारू रूप से चलते रहें।
सूरज मंद्रवाल ने कहा कि शिक्षक जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की कीमत पर नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते संतुलित समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।


