सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस हेवेनली फुटहिल्स कालोनी में बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ लोगों का गुस्सा शनिवार को खुलकर सड़क पर उतर आया।
रायपुर थाना पुलिस पर बिल्डर को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए करीब 80 कालोनीवासियों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर छह घंटे मौन धरना दिया।
आरोप है कि डीआरडीओ में तैनात वरिष्ठ वैज्ञानिक के साथ मारपीट कर उनका कान फाड़ दिया गया, उनकी वैज्ञानिक पत्नी और बुजुर्ग पिता से अभद्रता की गई, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी नहीं की।
कालोनीवासियों का कहना है कि एक के बाद एक गंभीर घटनाओं के बावजूद पुलिस हर बार हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर मामले को दबा देती है।
इसी वजह से आरोपित के हौसले लगातार बढ़ते गए व अब कालोनी में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के बीच भय का माहौल बन चुका है।
धरने पर बैठे लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डर लंबे समय से सरकारी जमीन कब्जाने, अवैध निर्माण, लोगों से मारपीट और धमकी देने जैसी घटनाओं में शामिल रहा है।
विरोध करने वालों पर उल्टे क्रास केस दर्ज करवा दिए जाते हैं। लोगों का कहना है कि कालोनी में रहने वाले वैज्ञानिक परिवार के साथ हुई ताजा घटना ने सभी को झकझोर दिया, क्योंकि इतनी गंभीर चोट के बाद भी पुलिस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
बच्चों के सामने पिस्टल दिखाने का भी आरोप
कालोनीवासियों ने आरोप लगाया कि दीपावली के दौरान बच्चों को डराने के लिए पिस्टल दिखाई गई थी। इसके बाद सोसाइटी अध्यक्ष के साथ भी रात में मारपीट, गालीगलौज व तेज रफ्तार कार से टक्कर मारने की कोशिश की गई।
आरोप है कि जब बच्चे परिसर में खेलते हैं तो उन्हें डराने के लिए बिल्डर अग्रवाल अपने वाहन बेहद तेज व खतरनाक गति से निकालाता है।
पुलिस की निष्क्रियता से बढ़ा आक्रोश
स्थानीय निवासियों ने कहा कि कई बार रायपुर थाना पुलिस को लिखित शिकायत दी गई, लेकिन हर बार कार्रवाई कागजों तक सीमित रही। इससे आरोपित के हौसले और बढ़े।
लोगों ने साफ कहा कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठे तो कालोनी में कभी भी बड़ी घटना हो सकती है। कालोनीवासियों के अनुसार वे कई वरिष्ठ अधिकारियों से मिल चुके हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया।
आरोप है कि रसूख के चलते कार्रवाई प्रभावित होती रही। इसी मजबूरी में अब लोगों को सार्वजनिक विरोध करना पड़ा।
पीएमओ और रक्षा मंत्रालय तक पहुंची शिकायत
डीआरडीओ वैज्ञानिक परिवार ने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय तक भेजी है।
बताया जा रहा है कि पीएमओ स्तर से जवाब मांगे जाने पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने की जानकारी देकर औपचारिक जवाब दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।


