जिले में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्राड से जुड़े एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो भारतीय नागरिकों की निजी जानकारी विदेशों में बेच रहा था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली, यूपी और हरियाणा समेत कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।
कई नाम आए सामने
साइबर थाना पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें कई अन्य साइबर अपराधियों के नाम और ठिकानों का खुलासा हुआ। पुलिस अब अन्य राज्यों की एजेंसियों से संपर्क कर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
जिले में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्राड से जुड़े एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो भारतीय नागरिकों की निजी जानकारी विदेशों में बेच रहा था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के तार दिल्ली, यूपी और हरियाणा समेत कई राज्यों से जुड़े हुए हैं।
कई नाम आए सामने
साइबर थाना पुलिस ने चार आरोपितों को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसमें कई अन्य साइबर अपराधियों के नाम और ठिकानों का खुलासा हुआ। पुलिस अब अन्य राज्यों की एजेंसियों से संपर्क कर पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
फर्जी सिम उपलब्ध कराने का खुलासा
जांच में यह भी सामने आया कि वैशाली के लालगंज निवासी गौरव कुमार ने फर्जी तरीके से सिम कार्ड उपलब्ध कराया था। इसी सिम के जरिए गिरोह अपना नेटवर्क संचालित कर रहा था।
किराए के खातों में आती थी रकम
साइबर अपराध से अर्जित रकम को सीधे अपने खातों में न लेकर भाड़े के बैंक खातों में मंगाया जाता था। इसके लिए साथियों के खातों का उपयोग किया जाता था और बदले में उन्हें पैसे दिए जाते थे।
छह आरोपितों पर केस
पुलिस ने इस मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। चार आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।


