गेहूं किसानों के लिए सरकार का बड़ा फैसला, 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त निर्यात को मिली मंजूरी

भारत सरकार ने गेहूं किसानों को राहत भरी खबर दी है। दरअसल केंद्र सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त गेहूं के निर्यात को मंजूरी देने का फैसला लिया है। इससे किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाने में मदद होगी साथ ही घरेलू बाजारों में भी स्थिरता बनी रहेगी। । यह निर्णय मौजूदा उत्पादन, भंडार में उपलब्ध और कीमतों में स्थिरता सभी पहलूओं के बारे में विस्तार से चर्चा करने के बाद लिया गया है।

आपको बता दें कि रबी सीजन 2026 में गेहूं की बुवाई का रकबा बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है, जो पिछले साल 328.04 लाख हेक्टेयर था। सरकार की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार खेती के क्षेत्रफल में यह बढ़ोतरी बताती है कि किसानों का गेहूं की खेती पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। किसानों के इस भरोसे की बड़ी वजह सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी और मजबूत खरीद व्यवस्था मानी जा रही है।

अतिरिक्त निर्यात को मिली मंजूरी

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 10 मार्च 2026 को जारी दूसरे अग्रिम आकलन के अनुसार, साल 2025–26 के लिए गेहूं के कुल उत्पादन का अनुमान 1,202 लाख मीट्रिक टन लगाया गया है। उत्पादन की अच्छी संभावनाओं और स्टॉक की अधिक उपलब्धता को देखते हुए, 25 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त एक्सपोर्ट का फैसला लिया गया। इससे पहले, जनवरी 2026 में DFPD ने 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी गई थी।

किसानों की आय बढ़ाने वाला फैसला

कृषि मंत्रालय के मुताबिक 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के अतिरिक्त निर्यात की अनुमति देने का यह नया फैसला बाजार में नकदी बढ़ने, और गेहूं के स्टॉक का बेहतर प्रबंधन करने का अनुमान है। इसके साथ ही मौसम के उतार-चढ़ाव के समय औने-पौने दाम में बिक्री को रोकने की भी कोशिश है। सबसे जरूरी बात ये है कि यह फैसला घरेलू मूल्यों को स्थिर रखने और किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित होगा। साथ ही देश की खाद्य सुरक्षा पूर्णतः सुरक्षित बनी रहेगी।

प्रेस रिलीज में कहा गया कि सरकार किसानों और उपभोक्ताओं के हितों में संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ खेती के क्षेत्र में सतत् विकास को करने के लिए संतुलित और समयोचित उपाय अपनाने का लगातार प्रयास कर रही है। सरकार के इस फैसले से जहां किसानों को आर्थिक मजबूती मिलेगी तो वहीं देश में स्टॉक और बेहतर प्रबंधन से कीमत और फूड सिक्योरिटी भी बेहतर बनी रहेगी।

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