शहर में उत्तर प्रदेश का पहला मित्र कीट पार्क (एंटोमोफेज पार्क) विकसित किया गया है। यह पार्क आइसीएआर के भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान (आइआइपीआर) परिसर में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से तैयार किया गया है।
इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में प्राकृतिक कीट नियंत्रण की तकनीक उपलब्ध कराना है।
आइआइपीआर की कीट वैज्ञानिक डॉ. नीलम यादव ने बताया कि इस पार्क में ऐसे फूलदार और औषधीय पौधे लगाए गए हैं, जो मित्र कीटों को आकर्षित करते हैं।
ये मित्र कीट फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले शत्रु कीटों को अपना भोजन बनाते हैं। इससे फसल सुरक्षित रहती है और रसायनों की जरूरत कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि किसान एक हेक्टेयर खेत में लगभग 0.35 हेक्टेयर क्षेत्र में इस तरह का पार्क विकसित कर सकते हैं।
इसके लिए फसल से सटे स्थान पर मौसम के अनुसार पौधरोपण करना होगा और रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग बंद करना होगा। उन्होंने बताया कि इस तकनीक से खेती की लागत घटेगी, मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, जल व वायु प्रदूषण कम होगा और उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्यान्न मिल सकेगा।


