जापान से लेकर भारत तक: दुनिया भर के स्कूलों में बच्चों की ‘लंच थाली’ में क्या-क्या होता है?

 आज के दौर में बच्चों का बेहतर स्वास्थ्य और पोषण पूरी दुनिया के लिए प्राथमिकता बन गया है। स्कूलों में अब केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि बच्चों की थाली पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है।

तले हुए और ज्यादा चीनी वाले जंक फूड को हटाकर अब वैज्ञानिक रूप से तैयार बैलेंस्ड डाइट पर जोर दिया जा रहा है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग देशों में स्कूली बच्चों को कैसा पौष्टिक आहार मिल रहा है।

यूरोप में स्वाद और परंपरा का संगम

फ्रांस के स्कूलों में दोपहर का खाना किसी उत्सव से कम नहीं होता। यहां बच्चों को फोर-कोर्स मील दिया जाता है, जिसमें स्टार्टर, मेन कोर्स, सब्जी, डेयरी प्रोडक्ट्स और मिठाई शामिल होती है। ऐसा लंच देने का मकसद बच्चों को फूड कल्चर से जोड़ना है, इसलिए यहां लंच सेशन 90 मिनट तक चल सकता है।

वहीं, इटली में मौसम के अनुसार मेनू बदला जाता है। वहां पास्ता या चावल के बाद मछली या मीट, और लास्ट में ताजी सब्जियां, रोटी और फल दिए जाते हैं। इंग्लैंड में भी अब मीठे और तले हुए खाने पर प्रतिबंध लगाकर फलों को शामिल करने की योजना पर काम हो रहा है।

जापान और ब्राजील- पोषण विशेषज्ञों की निगरानी

जापान में क्यूशोकू यानी स्कूल में खाने की परंपरा बहुत मजबूत है। यहां 99 प्रतिशत बच्चे स्कूल का ही खाना खाते हैं। यहां लगभग हर स्कूल में अपना न्यूट्रिशनिस्ट होता है, जो ताजी सामग्री से मेनू तैयार करता है। जापान में मिठाई केवल खास मौकों पर ही दी जाती है।

ब्राजील में भी रोजाना लगभग 5 करोड़ बच्चों को स्कूल में खाना परोसा जाता है। यहां नियम है कि खाने की 30% सामग्री स्थानीय खेतों से आनी चाहिए, ताकि बच्चों को ताजी और स्थानीय चीजें मिल सकें। हर क्षेत्र में न्यूट्रिशनिस्ट्स की देखरेख में प्रोसेस्ड फूड के बजाय ताजी सामग्री का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है।

भारत- दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल फीडिंग प्रोग्राम

भारत अपनी मिड-डे मील के जरिए कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को मुफ्त पौष्टिक खाना मुहैया करता है। यहां खाने में कैलोरी और प्रोटीन की मात्रा का ध्यान रखा जाता है। प्राइमरी लेवल पर 450 कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन, जबकि सीनियर प्राइमरी लेवल पर 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन सुनिश्चित किया जाता है। खाने में अनाज, दालें और सब्जियों का इस्तेमाल जरूर करना होता है।

अमेरिका- प्रोसेस्ड फूड का जाल

दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले अमेरिका में स्थिति थोड़ी अलग है। यहां के नियमों में दूध, फल और सब्जियां शामिल करना तो जरूरी है, लेकिन ज्यादातर स्कूलों में फ्रोजन फूड्स होते हैं, जिन्हें बाद में गर्म किया जाता है। इस कारण यहां का स्कूली भोजन काफी हद तक प्रोसेस्ड फूड्स की लिस्ट में आता है, जिसे सुधारने की कोशिशें जारी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *