बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सोनपुर एक बार फिर विकास की नई संभावनाओं को लेकर चर्चा में है। आस्था और आधुनिक विकास को साथ लेकर चलने की उनकी सोच ने इस ऐतिहासिक नगर को राज्य की प्राथमिकताओं में शामिल कर दिया है। खासतौर पर बाबा हरिहरनाथ मंदिर से उनका गहरा जुड़ाव अब योजनाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनकी धार्मिक आस्था में कोई कमी नहीं आई है। उपमुख्यमंत्री रहते हुए भी वे हर महत्वपूर्ण कार्य से पहले हरिहरनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते रहे हैं। यही आध्यात्मिक जुड़ाव अब सोनपुर को एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है।
पूर्व में उन्होंने इस मंदिर को काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर भव्य कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी, जिसका उद्देश्य देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करना है।
विकास के क्षेत्र में भी उनकी सोच व्यापक और दूरदर्शी रही है। उन्होंने सोनपुर को “गोद” लेने की घोषणा करते हुए गंगा किनारे मरीन ड्राइव और आधुनिक वाटरफ्रंट विकसित करने की योजना प्रस्तुत की थी। इसके साथ ही एक नए आधुनिक शहर के निर्माण की भी रूपरेखा तैयार की जा रही है, जहां चौड़ी सड़कों, स्मार्ट लाइटिंग और बेहतर परिवहन सुविधाओं की व्यवस्था होगी।
आर्थिक विकास को गति देने के लिए रिवर व्यू बाजार, इको-टूरिज्म पार्क और विशेष विकास पैकेज जैसी योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ाने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की कोशिश की जा रही है।
इसके अलावा, सोनपुर की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाया जा सके।
गौरतलब है कि गृह मंत्री का पदभार संभालने से पहले भी सम्राट चौधरी ने हरिहरनाथ मंदिर में पूजा कर अपने विकास संकल्प को दोहराया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि अगले पांच वर्षों में सोनपुर को बिहार के प्रमुख विकसित क्षेत्रों में शामिल करना उनका लक्ष्य है।
इस दौरान विजय कुमार सिन्हा समेत कई जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में यह भी कहा गया कि एनडीए सरकार सोनपुर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
मंदिर न्यास समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से न केवल बाबा हरिहरनाथ मंदिर का कायाकल्प होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र का तेजी से विकास सुनिश्चित होगा। अब यह देखना अहम होगा कि इन महत्वाकांक्षी योजनाओं को जमीन पर उतारने की गति कितनी तेज रहती है।


