फार्मर रजिस्ट्री न कराने वाले किसानों की समस्याएं बढ़ने वाली हैं। जिले में अब तक दो लाख 41 हजार किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ ले रहे हैं।
इनमें अब तक कुल एक लाख 96 हजार 808 किसानों ने ही अपनी कृषक आइडी (फार्मर रजिस्ट्री) बनवा ली है। शेष 44 हजार किसान फार्मर रजिस्ट्री बनवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
अब इन किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने व खाद लेने में फार्मर रजिस्ट्री दिखानी पड़ेगी। अगर किसान के पास फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगी तो उसे खाद मिलने के साथ गेहूं बेचने में परेशानी आएगी।
समय के साथ खेती को भी सरकार डिजिटल करना चाहती है, जिससे किसानों को योजनाओं का सीधे लाभ मिल सके। किसानों को किसी भी योजना की जानकारी व लाभ लेने के लिए अलग-अलग पोर्टल पर जाना पड़ता है। फार्मर रजिस्ट्री एक तरह का डिजिटल प्लेटफार्म है।
जिसमें किसान की जमीन, फसल और व्यक्तिगत जानकारी एक जगह कराकर कहीं भी इसे देख सकता है। फार्मर रजिस्ट्री कराने में अभी भी शत प्रतिशत किसान दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। जिससे उन्हें भविष्य में सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाएगा।
जिन किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है आने वाले समय में उन्हें खाद मिलने का संकट खड़ा हो जाएगा और क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। जिले में अब तक करीब 44 हजार किसानों ने इस योजना का लाभ नहीं लिया है जिन्हें लगातार जिम्मेदार फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
इस तरह से करें फार्मर रजिस्ट्री
आधिकारिक वेबसाइट पर या यूपी फार्मर रजिस्ट्री एप, जन सेवा केंद्र के माध्यम से आधार, खतौनी (जमीन के कागज), और आधार-लिंक मोबाइल नंबर का उपयोग करके कर सकते हैं। यह प्रक्रिया बिल्कुल मुफ्त है और गांव में लगने वाले सरकारी कैंप में भी पूरी की जा सकती है।
हर योजना का आसानी से मिलेगा लाभ
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, कृषि सब्सिडी, फसल नुकसान पर मुआवजा भी फार्मर रजिस्ट्री कराने वाले किसानों को मिलेगा।
अगर किसी किसान ने बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड बनवाना है उसके लिए भी उसे फार्मर रजिस्ट्री आवश्यक कर दी गई है। इससे ऋण लेने में आसानी होगी और कई तरह के कागज नहीं लगाने पड़ेंगे। किसान का पूरा डेटा इंटरनेट पर अपलोड कर दिया जाता है।


