मैं महाभारतकालीन नगरी हरिपुर हूं, जिसे आज हापुड़ के नाम से जाना जाता है। इतिहास की गहराई और वर्तमान की रफ्तार के बीच मैंने कई जिलाधिकारियों को आते-जाते देखा है।
2011 में गाजियाबाद से अलग होकर जिला बना और तब से अब तक 16 जिलाधिकारी यहां तैनात रहे। अब कविता मीणा ने 17वीं जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला है।
इन सबके बीच एक नाम ऐसा है, जिसे मेरी जनता लंबे समय तक याद रखेगी, वह है अभिषेक पांडेय का। महज 363 दिनों के कार्यकाल में उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारी को संवेदनशीलता के साथ जोड़ा और आमजन के दिलों में उतर गए।
जमीन पर उतरकर काम करने वाले अधिकारी हैं डीएम अभिषेक
वह केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं रहे, बल्कि जमीन पर उतरकर काम करने वाले प्रशासक बने। सिंभावली क्षेत्र में खेतों की मेढ़ को लेकर सालभर से चल रहे विवाद को उन्होंने खुद मौके पर पहुंचकर अपने सामने नाप कराई और आधे घंटे में सुलझा दिया। यह घटना केवल समाधान नहीं, बल्कि उनकी कार्यशैली का परिचय बन गई।
गंगा में बाढ़ आई तो वह पानी में उतरकर गांवों तक पहुंचे। शहर में जलभराव हुआ तो नालों और सड़कों पर पानी में घुसकर खुद हालात देखने निकल पड़े। कीचड़ हो या संकट, उन्होंने दूरी बनाकर नहीं बल्कि उसमें उतरकर हालात समझे।
जनसुनवाई उनके कार्यकाल की पहचान बनी। हर शिकायत को गंभीरता से सुनना, मौके पर समाधान तलाशना और जिम्मेदारी तय करना, यह उनका रोजमर्रा का तरीका था।
एक सप्ताह में तैयार करा दी थी ग्रामीण की छत
आमजन को लगा कि प्रशासन उनके दरवाजे तक नहीं, बल्कि उनके साथ खड़ा है। तभी तो अच्छेजा गांव में एक ग्रामीण के घर पर छत नहीं होने की जानकारी होने पर वह सुबह सात बजे जा पहुंचे। हालात को जाना और एक सप्ताह में उनके सिर पर छत तैयार करा दी।
संवेदनशीलता उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी पहचान रही। एसएसवी कॉलेज में एक रोते बच्चे को गोद में लेकर खिलाना हो या शहीद जवान के अंतिम संस्कार में परिवार के साथ फूट-फूटकर रो पड़ना, इन दृश्यों ने उन्हें ‘अफसर’ से आगे बढ़ाकर ‘अपना’ बना दिया।
आंधी के बाद शहर में बिजली ठप हुई तो रातभर जागकर सप्लाई बहाल कराना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा। जब तक व्यवस्था पटरी पर नहीं आई, वह खुद चैन से नहीं बैठे।
हर किसी को याद रहेंगे अभिषेक
आज जब वह विदा हो रहे हैं, तो हापुड़ की आवाज साफ है, ‘काम करने वाले अफसर भुलाए नहीं जाते।’ महाभारत की इस धरती से यही संदेश है कि अभिषेक पांडेय के कामों की छाप लंबे समय तक लोगों के दिलों में बनी रहेगी।


