Deoghar : बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सुरक्षा में बड़ा बदलाव, प्रवेश द्वार पर लगेगा डीएफएमडी

 बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और मजूबत होगी। इसके लिए सिस्टम तैयार किया जा रहा है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर सुरक्षा बढ़ाने के साथ ही परिसर के एक-एक कर्मी का डेटा बेस भी तैयार होगा। इसके साथ ही मंदिर की सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिए सभी प्रवेश द्वारों पर डीएफएमडी (डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर) सेट लगाया जाएगा।

एसपी सौरभ ने बताया कि इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पिछले कुछ समय से हैंड हेल्ड मेडल डिटेक्टर का उपयोग किया जा रहा था, लेकिन मंदिर में बढ़ती भीड़ को देखते हुए डीएफएमडी की जरूरत पड़ी है। मंदिर की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयास कर रहा है।

इस संदर्भ में पुलिस ने सुरक्षा ऑडिट किया, जिसमें एसपी व अन्य अधिकारियों ने मंदिर की सुरक्षा-व्यवस्था का गहन निरीक्षण किया है।

मंदिर में जिला बल के साथ-साथ 50 आईआरबी के जवानों की तैनाती की गई है। हाल ही में दान पेटी में पाकिस्तानी करेंसी मिलने और सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट के बाद मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की जा रही है।

बनेगा क्लाक रूम , सामान ले जाने पर पाबंदी:

अब श्रद्धालु मोबाइल फोन, बैग और अन्य सामान मंदिर के अंदर नहीं ले जा सकेंगे। इसके लिए मंदिर परिसर में क्यू कांप्लेक्स में एक क्लाक रूम बनाया जाएगा। श्रद्धालु अपना सामान यहीं जमा करेंगे। बाबा भोले का दर्शन करने के बाद उन्हें यह सामान वापस कर दिया जाएगा। उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा ने बताया कि यह व्यवस्था सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।

बिना पहचान पत्र के नहीं लगा सकेंगे स्टॉल:

पूजा सामग्री के लिए परिसर में छोटे-छोटे स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके लिए 75 लोगों को अनुमति दी जाएगी। सभी को मंदिर प्रशासन पहचान पत्र जारी करेगा। मंदिर के अंदर लगने वाले इन स्टॉल को भी व्यवस्थित भी किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं हो।

सभी लोगों का तैयार हो रहा डेटा:

मंदिर परिसर में कई अस्थायी दुकान लगती है। फूल-बेलपत्र, सिंदूर, पूजा की सामग्री, धूप अगरबत्ती बेचने वाले रहते हैं। फोटोग्राफर होते हैं। गठबंधन चढ़ाने वाले गुमस्ता होते हैं। अब सबका डेटा बेस बन रहा है। इस बार इस डेटा बेस को तैयार करने में मंदिर थाना पुलिस काम कर रही है।

क्या है डीएफएमडी?

अमूमन हवाई अड्डों और सार्वजनिक स्थानों के साथ ही मंदिरों में भी एक मूक रक्षक के रूप में काम करता है। यह चाकू या बंदूक जैसे धातु-आधारित खतरों को पहचान लेता है। धातु का पता चलने पर यह ध्वनि और रोशनी के माध्यम से संकेत देता है। यह मौसम-रोधी होता है। अब इसमें डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग भी होती है।

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