अमरनाथ यात्रा की अवधि 57 दिन तक होना कोई पहली बार नहीं है। इससे पूर्व यात्रा की अवधि दो महीने होती रही है। 2018 हो या इससे पहले भी यात्रा कई बार दो माह तक चल चुकी है।
श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड भी प्रबंध भी यात्रा की अवधि को देखकर करता है। बाबा बर्फानी लंगर आर्गेनाइजेशन के प्रधान राजन गुप्ता का कहना है कि 57 दिन की यात्रा का स्वागत करते हैं, लेकिन अगर पिछले आठ-10 साल की यात्रा पर नजर डालें तो पता चलता है कि पहले 20-25 दिन अधिक यात्री आते हैं।
उसके बाद कमी आ जाती है। अगर यात्रा की अवधि लंबी करनी है तो श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि अंत तक यात्री आते रहें। पिछले तीन-चार साल से यह देखा जा रहा है कि यात्रा के आखिरी 10 दिन सप्ताह पहले ही यात्रा को बंद कर दिया जाता है।
मौसम व रास्ते खराब का हवाला दिया जाता है। यात्रा की अवधि हर पहलू को ध्यान में रखकर ही निर्धरित की जानी चाहिए। यात्रा के मुताबिक लंगर वालों को वापस जाने की इजाजत देनी चाहिए।
15 से 20 दिन में बाबा बर्फानी हो जाते अंतर्ध्यान
अक्सर यह देखा गया है कि यात्रा के पहले 15-20 दिन में बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान हो जाते है। उसके बाद यात्रियों की संख्या कम होती जाती है। एक पहलू यह भी है कि समय-समय पर यात्रा की अवधि कम होने पर विवाद होते रहे है।
हिंदू व धार्मिक संगठनों ने पहले कई बार यात्रा की अवधि कम होने पर सवाल उठाए हैं। श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड यात्रा मार्गों पर बर्फ हटाने की प्रक्रिया, मरम्मत कार्यों व अन्य सुविधाओं को ध्यान में रखकर हर पहलू पर विचार करके ही फैसला करता है।


